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आखिर क्या है वो वजह जिसके चलते इतनी तेजी से भारत में लोकप्रिय हुआ पबजी गेम

Thu, 03 Sep 2020 01:32 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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pubg ban - फोटो : Social Media
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सरकार ने बुधवार शाम एक और डिजिटल स्ट्राइक करते हुए पबजी मोबाइल गेम समेत 118 एप्स पर प्रतिबंध लगाया। इससे पहले जून में भी सरकार ने ऐसे कई एप्स पर प्रतिबंध लगाए थे। जब सरकार ने टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाया था, तब इतने लोग उदास नहीं थे, जितना पबजी बैन होने के बाद हो रहे हैं। 

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भारत में पबजी मोबाइल और पबजी मोबाइल लाइट के कुल मिलाकर 5 करोड़ एक्टिव यूजर्स हैं, इनमें से 1.3 करोड़ यूजर्स हर रोज इस एप का इस्तेमाल करते हैं। इस गेम का गैर-मोबाइल संस्करण भी है, जिसे पबजी पीसी के नाम से जाना जाता है और इसे कंप्यूटर और लैपटॉप पर खेलने के लिए बनाया गया है। 


पबजी पीसी को कोरियाई कंपनी ने बनाया है और इसका स्वामित्व भी इसी के पास है। वहीं, अन्य दो मोबाइल वर्जन वाले गेम चीनी कंपनी टेनसेंट गेम्स द्वारा तैयार किए गए और इन गेम्स का स्वामित्व भी इसी चीनी कंपनी के पास है। 
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इन कारणों से लोकप्रिय हुआ पबजी
भारत में पबजी के लोकप्रिय होने के पीछे कई कारण हैं। स्ट्रीम करने में आसानी, खेलते वक्त दोस्तों से वॉयस चैट करना और गेम को इस तरह तैयार किया जाना कि इसे खेलते वक्त रोमांच आ जाए। ये कुछ ऐसे कारण हैं, जिनकी वजह से ये गेम तेजी से भारतीय यूजर्स के बीच छा गया। 

भारत खेल का सबसे बड़ा बाजार है। लेकिन इन खेलों में ई-स्पोर्ट्स उद्योग के राजस्व की एक बड़ी हिस्सेदारी है। पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि भारतीय युवा स्कूलों और कॉलेजों की पढ़ाई को बीच में छोड़कर पेशेवर लीग और टूर्नामेंट में खेल रहे हैं। 

यह भी पढ़ें: PUBG समेत 118 एप्स पर लगा बैन, विवादों से रहा है पुराना नाता, देखें सभी एप्स के नाम

इस तरह वे हजारों रुपये हर महीने पुरस्कार राशि के रूप में कमा रहे हैं। इसके अलावा, प्रायोजकों और विज्ञापन के जरिए भी वे हजारों रुपये की कमाई कर रहे हैं। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इन युवा खिलाड़ियों की फैन फॉलोइंग बढ़ रही है। 

इन युवाओं में से कुछ का प्रतिनिधित्व 'एबुलेंट गेमिंग इंडिया' और 'फैनेटिक इंडिया' जैसी प्रतिभा प्रबंधन एजेंसियों द्वारा किया जाता है, जो पेशेवर गेमर्स के लिए समर्पित हैं। इनमें से अधिकतर गेमर्स पबजी मोबाइल या लाइट खेलने में माहिर होते हैं। 

पबजी द्वारा छोड़े गए खालीपन को पूरा करने में लगेंगे एक साल
'एबुलेंट गेमिंग इंडिया' के सहसंस्थापक अमन गर्ग (22) ने कहा कि उनका आधे से ज्यादा राजस्व पबजी स्ट्रीमर्स के जरिए आता है। लोग यूट्यूब पर अन्य लोगों को इस गेम को लाइव खेलते हुए देखते हैं। इस दौरान उन्हें लाइव कमेंट्री भी मिलती है। दर्शकों का उत्साह यह जानने में बना रहता है कि कौन इस खेल को जीतेगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए पैसा प्रायोजकों और दर्शकों के दान के जरिए आता है। 
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गर्ग ने पबजी के देश में प्रतिबंधित होने पर कहा, यह प्रतिबंध निश्चित रूप से भारतीय ई-स्पोर्ट्स उद्योग के लिए एक झटका है। उन्होंने कहा, यह प्रतिबंध एक खाली जगह पैदा करेगा, जो किसी अन्य गेम द्वारा भरा जाएगा। लेकिन ऐसा होने में आठ महीने से लेकर एक साल तक का समय लग सकता है।

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