सोनिया गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि संसद के विशेष सत्र के लिए कोई एजेंडा सूचीबद्ध नहीं है और अनुरोध किया कि मणिपुर में हिंसा और महंगाई सहित नौ मुद्दों को चर्चा के लिए उठाया जाए।
बीआरएस एमएलसी ने क्या दी प्रतिक्रिया
कविता ने एक ट्वीट में लिखा, 'यह देखकर दुख हुआ कि कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख और सांसद सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा की तात्कालिकता को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने सोनिया गांधी से पूछा, राष्ट्र लैंगिक समानता के लिए आपकी मजबूत वकालत का इंतजार कर रहा है। पीएम मोदी को लिखे आपके पत्र में हमें नौ महत्वपूर्ण मुद्दे मिलते हैं, लेकिन महिला आरक्षण विधेयक क्यों नहीं? क्या महिलाओं का प्रतिनिधित्व राष्ट्र के लिए जरूरी नहीं है?'
सोनिया के पत्र में इन मुद्दों पर चर्चा की मांग
सोनिया गांधी द्वारा सूचीबद्ध मुद्दों में केंद्र-राज्य संबंध, सांप्रदायिक तनाव के मामलों में वृद्धि, चीन द्वारा सीमा उल्लंघन और भ्रष्ट प्रथाओं के बारे में कई खुलासों के प्रकाश में अदाणी व्यापार समूह के लेनदेन की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग शामिल है। संसद का विशेष सत्र 18 से 22 सितंबर तक चलेगा।
विधेयक पर सभी दलों से एकजुट होने का किया आग्रह
महिला आरक्षण विधेयक के लिए बीआरएस नेता कविता की अपील ने कांग्रेस और भाजपा सहित 47 राजनीतिक दलों को लिखे पत्र से राष्ट्रव्यापी ध्यान आकर्षित किया और उनसे संसद में विधेयक को पारित कराने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया।
देशभर के राजनीतिक दलों से बात कर रहीं कविता
मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी कविता ने विधेयक को पटल पर रखने और पारित करने की मांग को लेकर मार्च में भूख हड़ताल की थी और वह इस पर कानून बनाने की मांग को आगे बढ़ाने के लिए पूरे भारत में राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों के साथ बातचीत कर रही हैं।