व्यभिचार(अडेल्ट्री) मामले में मर्द ही अपराधी क्यों, महिलाएं क्यों नहीं, इस मसले पर अब
संविधान पीठ परीक्षण करेगी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने शुक्रवार को भारतीय दंड संहिता की धारा-497 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेज दिया है।
मालूम हो कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने 150 वर्ष पूर्व इस कानूनी प्रावधान को प्रथम दृष्टया पुरातनकालीन बताया था। शीर्ष अदालत का कहना था कि यह प्रावधान महिला और पुरुष को एक समान नजर से नहीं देखता। आपराधिक कानून पुरुष और स्त्रियों के लिए बराबर है लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा-497 में इस सिद्धांत का अभाव है। पीठ ने कहा था कि कोई कानून महिलाओं को यह कहते हुए संरक्षण नहीं दे सकता कि व्यभिचार के मामले में हमेशा महिला पीड़िता होती हैं।
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