फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीएसटी पर विशेष सत्र का बहिष्कार क्यों कर रहा है विपक्ष?

Fri, 30 Jun 2017 01:11 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
विज्ञापन
Special Session on GST
विज्ञापन
देश के सबसे बड़े कर सुधार यानी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की लॉन्चिंग के मौके पर कांग्रेस समेत ज्यादातर विपक्षी पार्टियां मौजूद नहीं रहेंगी। कांग्रेस ने कहा है कि 30 जून की आधी रात को संसद के सेंट्रल हॉल में जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर पर बुलाए गए विशेष सत्र में हिस्सा नहीं लेगी।
विज्ञापन


वाम दल, तृणमूल कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी समेत कई अन्य पार्टियों ने भी बहिष्कार का फैसला लिया है। दरअसल, शुक्रवार की आधी रात के बाद देश को एक नई कर व्यवस्था मिलने वाली है। 14 अगस्त 1947 को संसद के केंद्रीय कक्ष में आजाद भारत का जन्म हुआ था, इसी तर्ज पर मोदी सरकार ने जीएसटी लॉन्चिंग के लिए आधी रात को कार्यक्रम रखा है।

छोटे और मझोले व्यापारियों को होगी मुश्किल

GST
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने आधी रात को होने वाले इस कार्यक्रम को संसद की गरिमा के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा, "संसद के सेंट्रल हॉल में 1947 से लेकर 1997 तक आधी रात को जितने कार्यक्रम हुए हैं, वो आजादी का जश्न मनाने के लिए हुए हैं। यहां दिन में तो कई कार्यक्रम हुए हैं। 

शायद बीजेपी के लिए 1947 कोई मायने नहीं रखता होगा, 1972 या 1997 भी मायने नहीं रखता होगा जब आजादी की रजत और स्वर्ण जयंती मनाई गई। आजाद के मुताबिक, ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत को आजाद कराने में उनकी कोई भूमिका ही नहीं रही। तृणमूल कांग्रेस ने पहले ही साफ कर दिया है कि वो इस कार्यक्रम में भाग नहीं लेगी।

राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने बीबीसी संवाददाता हरिता कांडपाल से कहा, 'हम लोगों ने जीएसटी का हमेशा से समर्थन किया है। लेकिन बीजेपी जब विपक्ष में थी तो वो इसका विरोध करती थी। अब वो खुद को इसको लागू कर रही है। 

लेकिन इसकी तैयारी मुकम्मल नहीं है। उनका कहना था कि जीएसटी को छह महीने या साल भर के लिए टाल देना चाहिए। चूंकि तैयारी पूरी नहीं है, इसलिए छोटे और मझोले व्यापारियों को मुश्किल होगी।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आने की उम्मीद कम 

Manmohan Singh
आधी रात को होने वाले कार्यक्रम में मंच पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के अलावा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया था। लेकिन कांग्रेस के रुख से साफ है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इसमें मौजूद नहीं रहेंगे। 

हालांकि इस मुद्दे पर कांग्रेस में मतभेद नजर आ रहा है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक लेख में इसे बहुत बड़ी उपलब्धि बताई है और इसमें देरी के लिए बीजेपी की ओर इशारा किया है। 

राष्ट्रपति चुनावों में एनडीए उम्मीदवार को समर्थन करने वाली जदयू पार्टी ने इसमें हिस्सा लेने का फैसला किया है। हालांकि जदयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा है कि पार्टी ने इसके लिए कोई व्हिप जारी नहीं करेगी।
विज्ञापन

विपक्ष अपने फैसले दोबारा पर विचार करें

Arun Jaitely
इस बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सभी विपक्षी दलों से अपील की है कि वो अपने फैसले पर फिर से विचार करें। जबकि केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा है कि आखिरी समय में इस ऐतिहासिक मौके पर विपक्षी दलों का अपना कदम पीछे खींचने की कोई वजह समझ नहीं आती। 

उन्होंने कहा, 'उनके पास कोई मुद्दा नहीं है। सरकार की आलोचना करना ही उनका मुख्य उद्देश्य लग रहा है। नायडू ने इसे देश में कर सुधार को लेकर एक 'क्रांतिकारी' कदम बताया है। आधी रात को प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति एक ऐप के द्वारा जीएसटी को लॉन्च करेंगे। 

जीएसटी विधेयक को कानून बनाने के लिए एक दशक से बात हो रही थी लेकिन राजनीतिक रस्साकशी के कारण ये अधर में लटक गया था। ड्राफ्ट बिल से लेकर संसद में बहस कराए जाने तक भारत को दस साल लगे। सरकार और उससे सहमत अर्थशास्त्री इसे आज़ादी के बाद का भारत का सबसे बड़ा कर सुधार मान रहे हैं।

इस नई कर व्यवस्था से केंद्र और राज्य सरकारों के वस्तुओं और सेवाओं पर लगाए जाने वाले सभी अप्रत्यक्ष करों की जगह एक समान कर वजूद में आ जाएगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें