केरल में आई सदी की सबसे भयानक बाढ़ को केंद्र सरकार ने गंभीर प्राकृतिक आपदा घोषित कर दिया है। सामान्य से ज्यादा हुई बारिश के चलते आई बाढ़ से मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। भले ही भारत में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से मरने वालों की संख्या ज्यादा नहीं है लेकिन इनमें देशभर में बहुत ज्यादा नुकसान करने की क्षमता है। लेकिन ज्यादा नुकसान की संभावना वाले राज्यों में से अधिकांश को बाढ़ प्रबंधन के लिए निर्धारित धन से कम मिला है।
किन राज्य में बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान की संभावना है
साल 1980 में राष्ट्रीय बाढ़ आयोग के आकलन के मुताबिक देशभर में 40 मिलियन हेक्टेयर भूमि में बाढ़ की संभवना है। उत्तराखंड, बिहार और पंजाब में नुकसान की संभावना वाले ये क्षेत्र सबसे ज्यादा हैं।
राज्य जहां बाढ़ की संभावना वाले क्षेत्र एक मिलियन हेक्टेयर से ज्यादा हैं (मिलियन हेक्टेयर में)
उत्तराखंड 7.3
उत्तर प्रदेश 7.3
बिहार 4.3
झारखंड 4.3
पंजाब 3.7
राजस्थान 3.3
असम 3.2
पश्चिम बंगाल 2.7
हरियाणा 2.4
आंध्र प्रदेश 1.4
गुजरात 1.4
ओडिशा 1.4
तेलंगाना 1.4
क्या बाढ़ सबसे जानलेवा प्राकृतिक आपदा है?
नहीं, बाढ़ से सबसे ज्यादा मौत नहीं होती। साल 2015 में 2,600 से ज्यादा लोग की मौत आकाशीय बिजली गिरने से हुई थी, जो प्राकृतिक आपदा की वजह से सबसे ज्यादा मौत है। इसके बाद लू और ठंड लगने से सबसे ज्यादा मौत हुई। इन तीनों के बाद बाढ़ की नंबर आता है। हालांकि बाढ़ की वजह से संपत्ति का नुकसान किसी भी प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा होता है।
विभिन्न बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रमों की स्थिति क्या है?
31 मार्च 2018 तक बाढ़ प्रबंधन के लिए कुल आवंटित कार्यों की लागत 13,238 करोड़ रुपये थी (11वीं और 12वीं योजना वर्ष के लिए)। ताजा आंकड़ों के मुताबिक महज 4,873 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। आवंटन के लिहाज से टॉप 10 राज्यों में से ज्यादातर को आधे से भी कम राशि प्राप्त हुई है।
क्या केरल में देश का सबसे ज्यादा बारिश होने वाला जिला है?
सामान्य वर्षों में केरल का सिर्फ एक जिला है जो मॉनसून के मौसम (अगस्त 2018 तक) में टॉप 10 में शुमार रहता है। इस साल केरल के सबसे ज्यादा चार जिले ऐसे हैं जो टॉप 10 में शामिल हैं।