सुप्रीम कोर्ट मणिपुर और जम्मू-कश्मीर में अभियान चलाने पर दर्ज मामलों को चुनौती देनी वाली 300 सैन्य कर्मियों की याचिका पर 4 सितंबर को सुनवाई करेगा। दोनों ही राज्यों में सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) लागू है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी. लोकुर, एस. अब्दुल नजीर और दीपक गुप्ता की पीठ ने सोमवार को कहा कि मामले पर जस्टिस लोकुर व यूयू ललित की पीठ ही सुनवाई करेगी। दरअसल, जस्टिस लोकुर और यूयू ललित की पीठ ने ही मणिपुर में सेना, असम राइफल्स व पुलिस की कथित फर्जी मुठभेड़ों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए थे।
इसी पीठ ने 14 जुलाई, 2017 को जांच के लिए सीबीआई का विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश भी दिया था। पीठ ने कहा था कि अफस्पा के तहत अशांत क्षेत्रों में सशस्त्र बलों या पुलिस की ओर से अतिरिक्त बल के प्रयोग की अनुमति नहीं है।
सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पिछला आदेश देने वाली पीठ के समक्ष ही मामले की सुनवाई पर सहमति जताई। पीठ ने कहा कि मणिपुर फर्जी मुठभेड़ मामलों से जुड़ी दो अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई 4 सितंबर को ही होगी। इनमें एक याचिका मणिपुर के पुलिस कर्मियों की ओर से भी दाखिल की गई है।
मुख्य याचिका में कहा गया है कि अशांत इलाकों में फर्ज निभाने पर सैन्य कर्मियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जा रहा है। अब जवान अपने अधिकारियों से सवाल करने लगे है कि क्या वे अभियान चलाए या नहीं?