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कोरोना से बचने के लिए घरेलू मास्क या मेडिकल मास्क? जानें क्या कहती हैं गाइडलाइंस

रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Tue, 14 Apr 2020 01:34 PM IST
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कोरोना से बचने के लिए मास्क लगाते लोग - फोटो : PTI

दुनियाभर में कोरोना महामारी ने 19 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। कोरोना से बचने के लिए अलग अलग स्वास्थ्य संगठनों ने कई गाइडलाइंस जारी की। इन गाइडलाइंस में मास्क पहनने और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने जैसी क्रियाओं को करने के लिए कहा गया लेकिन मास्क पहनने को लेकर समय दर समय गाइडलाइंस में बदलाव होता रहा। कई स्वास्थ्य महकमों ने स्वस्थ लोगों के मास्क पहनने पर सवाल खड़े किए तो कई संगठनों ने मास्क पहनने को सभी के लिए अनिवार्य किया।

चीन, हॉन्ग-कॉन्ग और ताइवान के अधिकारियों ने भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनने को जरूरी बताया जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना था कि ऐसा जरूरी नहीं कि हर किसी को मास्क पहनने की आवश्यकता है। अमेरिका ने अप्रैल की शुरुआत में अपने लोगों को कपड़े के बने मास्क पहनने को कहा। कोरोना की वजह से मेडिकल मास्क में कमी दिखी, स्वास्थ्य कर्मचारियों को मेडिकल मास्क की ज्यादा जरूरत थी।



स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए मेडिकल मास्क कम ना रह जाए इसके लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जनता से घर में बने मास्क पहनने को कहा। लेकिन मास्क को लेकर लगातार गाइडलाइंस में बदलाव होता गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आम लोगों के सर्जिकल मास्क ना पहनने पर ज्यादा जोर दिया।  

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कोरोना से बचने के लिए मास्क लगाते लोग - फोटो : PTI
दुनियाभर में कोरोना महामारी ने 19 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। कोरोना से बचने के लिए अलग अलग स्वास्थ्य संगठनों ने कई गाइडलाइंस जारी की। इन गाइडलाइंस में मास्क पहनने और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने जैसी क्रियाओं को करने के लिए कहा गया लेकिन मास्क पहनने को लेकर समय दर समय गाइडलाइंस में बदलाव होता रहा। कई स्वास्थ्य महकमों ने स्वस्थ लोगों के मास्क पहनने पर सवाल खड़े किए तो कई संगठनों ने मास्क पहनने को सभी के लिए अनिवार्य किया।

चीन, हॉन्ग-कॉन्ग और ताइवान के अधिकारियों ने भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनने को जरूरी बताया जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना था कि ऐसा जरूरी नहीं कि हर किसी को मास्क पहनने की आवश्यकता है। अमेरिका ने अप्रैल की शुरुआत में अपने लोगों को कपड़े के बने मास्क पहनने को कहा। कोरोना की वजह से मेडिकल मास्क में कमी दिखी, स्वास्थ्य कर्मचारियों को मेडिकल मास्क की ज्यादा जरूरत थी।

स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए मेडिकल मास्क कम ना रह जाए इसके लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जनता से घर में बने मास्क पहनने को कहा। लेकिन मास्क को लेकर लगातार गाइडलाइंस में बदलाव होता गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आम लोगों के सर्जिकल मास्क ना पहनने पर ज्यादा जोर दिया।  

मास्क पहनने पर अलग अलग गाइडलाइंस क्यों?

मास्क बनाते लोग - फोटो : PTI
पूर्वीय एशिया यानि कि चीन, ताइवान, हॉन्ग-कॉन्ग, दक्षिण कोरियो, उत्तरी कोरिया, जापान समेत अन्य देशों में मास्क पहनना एक आदत बन गया है। वहां के लोगों के बीच मास्क पहनने जैसी आदतें पहले से स्थापित हैं। साल 2002-2003 में SARS महामारी के चलते इन देशों में मास्क पहनने का चलन शुरू हो गया था। हालांकि इन देशों में सार्वजिनिक जगहों पर मास्क पहनने पर कोई एकमत नहीं है।

कुछ शोध मानते हैं कि कोरोना से बचने के लिए मास्क पहनना मददगार साबित हो सकता है। मास्क पहनने से एंफ्लुएंजा और SARS जैसे वायरस के फैलने का खतरा कम हो जाता है। कोरोना भी फैलने वाली बीमारी है, जो हाथ मिलाने या हवा में मौजूद ड्रॉपलेट के मुंह में जाने से हो सकता है। हालांकि कोरोना के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें मास्क पहनने का ज्यादा फायदा नहीं दिखा है।

यही कारण है कि कोरोना से बचने के लिए मास्क पहनने पर अलग अलग गाइडलाइंस है। मास्क पहनने के बाद भी कई लोगों में कोरोना के लक्षणों को देखा गया है।

मेडिकल मास्क पहनने की मनाही क्यों?

n95 mask - फोटो : amazon
कोरोना से संक्रमित मरीजों में बढ़ोतरी की वजह से मेडिकल मास्क की सप्लाई में कमी देखने को मिली। जब कोरोना महामारी फैलनी शुरू हुई तब कुछ डॉक्टर की तरफ से ये कहा गया कि आम लोग इससे बचने के लिए मास्क पहने, जिसकी वजह से अचानक से मेडिकल मास्क की सप्लाई कम हो गई। मेडिकल स्टोर पर मास्क की कमी हो गई, जिसकी वजह जरूरतमंद मेडिकल स्टाफ को मास्क मिलने में दिक्कत होेने लगी।

मेडिकल मास्क में भारी कमी को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से एडवाइजरी जारी की गई कि गैर संक्रमित लोग घर में बने मास्क पहने। इसके अलावा सेंटर ऑफ डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने भी लोगों से घरों में बने मास्क पहनने की अपील की। सीडीसी ने कहा कि जहां तक हो आम लोग किसी सूती कपड़े या स्कार्फ का मास्क बनाकर पहनें ताकि जरूरतमंद स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए मेडिकल मास्क की उपलब्धता बनी रहे।

मास्क पहनने से क्या मदद मिलेगी?

मास्क पहनकर जातीं युवतियां - फोटो : अमर उजाला
अभी तक के मामलों में देखा गया है कि कोरोना से संक्रमित मरीज के खांसने या छींकने से निकले सुक्ष्म कणों में कोरोना वायरस होता है, अगर ये कण दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंच जाते हैं तो उस व्यक्ति में भी कोरोना संक्रमण होने का खतरा रहता है। ये कण आंख, नाक और कान के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। 

अगर कोई संक्रमित व्यक्ति मास्क पहनकर खांसता या छींकता है तो ड्रॉपलेट हवा में गिरने की बजाय मास्क में रहेंगी जिससे दूसरे व्यक्ति तक संक्रमण के फैलने का खतरा कम हो जाएगा। हालांकि इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपना पक्ष साफ रखा है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मौजूदा समय में इस बात का कोई सबूत नहीं है कि स्वस्थ व्यक्ति के सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने से इंफेक्शन होने का खतरा कम हो जाएगा। 

स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए क्या हैं गाइडलाइंस?

मास्क पहने स्वास्थ्य कर्मचारी - फोटो : PTI
कोरोना से संक्रमित मरीजों को आइसोलेशन में रहने और मास्क पहनने के लिए प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। इसी के साथ कोरोना के मरीजों की देखभाल कर रहे स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए कुछ जरूरी गाइडलाइंस जारी की गई है। स्वास्थ्य कर्मचारियों को मरीजों की देखभाल करने के लिए मेडिकल मास्क पहनने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा कर्मचारियों को यूनिफॉर्म और दस्ताने पहनने के भी निर्देश दिए गए हैं।
 
सीडीसी ने सीमित सामानों पर भी गाइडलाइंस जारी कर कहा है कि स्वास्थ्य कर्मचारी सावधानियों के साथ जरूरी मेडिकल सामानों का इस्तेमाल करें। हालांकि अमेरिका के कई अस्पतालों में मेडिकल स्टाफ के लिए घर पर बने मास्क का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। 

क्या हैं मास्क पहनने के नकारात्मक पहलू?

सिकंदरा के अकबर टूम पर मास्क लगाए सैलानी - फोटो : अमर उजाला
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने छह अप्रैल को एक एडवाइजरी जारी की थी। इसमें डब्ल्यूएचओ ने कहा कि स्वस्थ लोग मास्क पहनकर एक तरह से सुरक्षा का गलत मतलब सामने ला रहे हैं। ज्यादातर लोग मास्क पहनने से ज्यादा जरूरी काम नहीं कर रहे हैं जैसे कि लगातार साबून से हाथ धोना या फिर लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखना।

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि मास्क पहनने से लोग अपने चेहरे पर हाथ ज्यादा लगाएंगे जिससे कोरोना वायरस के फैलने के ज्यादा खतरा बना रहेगा। कई स्वास्थ्य संगठन इस बात ज्यादा जोर देते हैं कि अगर मास्क पहन रहे हैं तो उसे ढंग से पहनें, अगर किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो तुरंत मास्क को बदल दें। मास्क पहनने के साथ साथ हाथों को साफ रखें। मास्क को एक कपड़े या अखबार में ढककर फेंकें। 

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि सर्जिकल मास्क जैसे मास्क जो सिर्फ एक बार के इस्तेमाल के लिए बने उन्हें बार बार ना पहनें। 
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