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Delhi: संदीप दीक्षित को क्यों उम्मीद कि इस बार दिल्ली की जनता 'कांग्रेस' को समझ रही, घर वापसी करेंगे वोटर?

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 07 Jan 2025 07:37 PM IST

सार

संदीप दीक्षित ने अमर उजाला डॉट कॉम को दिए साक्षात्कार में कहा कि हमें इस बार अपने वोटरों पर पूरा भरोसा है कि वे कांग्रेस को निराश नहीं करेंगे। उन्होंने 2013 के बाद की व्यवस्था देख ली है। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव में बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है।
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Sandeep Dixit - फोटो : Amar Ujala


संदीप दीक्षित ने अमर उजाला डॉट कॉम को दिए साक्षात्कार में यह बात कही है। उनका कहना है, हमें इस बार अपने वोटरों पर पूरा भरोसा है कि वे कांग्रेस को निराश नहीं करेंगे। उन्होंने 2013 के बाद की व्यवस्था देख ली है। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव में बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है। 2013 में दिल्ली का माहौल अलग था। लोकपाल और भ्रष्टाचार को लेकर आंदोलन हुआ था। कांग्रेस पार्टी की छवि खराब करने का प्रयास हुआ था। हालांकि बाद में विपक्ष के सभी आरोप निराधार निकले थे। यह बात जनता भी मान चुकी है कि कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ। कोविड के बाद से दिल्ली की जनता, कांग्रेस को समझ रही है। दिल्ली की जनता, घर वापसी के लिए तैयार है। 


लोग समझ रहे हैं कि आप सरकार, हर बात में यह कह देती है कि उसे काम नहीं करने दिया गया। ये बहाना लोग जानते हैं। दो दशक पहले तक कांग्रेस का वोट प्रतिशत लगभग 24 प्रतिशत रहा था, अब 5 फीसदी के आसपास पहुंच गया है, इस सवाल के जवाब में दीक्षित ने कहा, पहले लोग यह सोचते थे कि कांग्रेस पार्टी, सक्रिय नहीं थी, इसलिए 'आप' को वोट दे दो। उनका मकसद था, भाजपा को सत्ता में आने से रोकना। अब दिल्ली की जनता चाह रही है कि कांग्रेस को मौका दिया जाए। उनके लिए कांग्रेस नई पार्टी नहीं है। वे कांग्रेस को बखूबी जानते हैं। शीला दीक्षित के समय में दलित, मुस्लिम और पूर्वांचल के लोग, कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़े थे।  


कांग्रेस का वोट, जो आम आदमी पार्टी की तरफ शिफ्ट हो गया था, अब वह वापस आ जाएगा, ऐसी उम्मीद है। प्रारंभ में केजरीवाल की पार्टी को जो वोट मिले थे, उसमें लगभग 15 प्रतिशत वोटर तो कांग्रेस का था। बतौर संदीप दीक्षित, ठीक है उस वक्त के हालात ऐसे हो चले थे, जिनमें लोग यह समझ बैठे कि कांग्रेस ही सब बातों के लिए जिम्मेदार है। भाजपा और आप ने इसका फायदा उठाया। आज स्थिति बदल रही है। लोग दोबारा से अपनी पेरेंट पार्टी की ओर लौट रहे हैं। शीला दीक्षित ने सभी वर्गों के लिए काम किया था। उनका फोकस विकास पर था। इसी वजह से दलित और मुस्लिम समुदाय भी बड़े पैमाने पर कांग्रेस से जुड़ गया था। लोगों को जब काम मिला तो उन्होंने कांग्रेस पार्टी को वोट दिया। 


संदीप ने कहा, अब इन दोनों समुदायों ने देखा कि 'आप' ने उनके लिए कुछ नहीं किया। कोविड में जब मुस्लिमों पर आरोप लगा कि वे महामारी को फैला रहे हैं तो आप कुछ नहीं बोली। संभल में मुस्लिमों को लेकर यह पार्टी चुप रही। सफाई कर्मियों को स्थायी नौकरी नहीं मिल रही। वे झुग्गी में रहते हैं, लेकिन वहां पक्के मकान नहीं बन सके। जो वायदे किए गए, वे जीरो रहे। कांग्रेस का विकल्प आप है, इस बात को समझने में कांग्रेस ने देर क्यों लगाई, इस सवाल पर दीक्षित बोले, देखिये सब परिस्थितियों की बात है। पिछले दिनों अजय माकन भी इस बाबत कह चुके हैं। 


कांग्रेस पार्टी अब मान रही है कि उसे जितना नुकसान 'आप' ने पहुंचाया है, उतना भाजपा ने नहीं। केजरीवाल तो शुरु से कह ही रहे थे कि आम आदमी पार्टी ही कांग्रेस का विकल्प है। केजरीवाल मंदिर जाते हैं, तो यह मान लें कि वे भाजपा का विकल्प बनने का प्रयास कर रहे हैं। दरअसल, केजरीवाल की पार्टी की कोई पहचान नहीं हैं। इसका मकसद केवल कांग्रेस को नुकसान पहुंचाना है। हर जगह पर आप, भाजपा को फायदा पहुंचा रही है। 


क्या 2013 में शीला दीक्षित 'आप' को समर्थन देने के पक्ष में नहीं थी, इस बाबत संदीप बोले, 2013 में कांग्रेस के पास आठ विधायक थे। तब आप के पक्ष में माहौल बन चुका था। कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को यह फीडबैक मिल चुका था कि देर सवेर उनके विधायक इधर उधर हो सकते हैं। उस स्थिति में अगर दोबारा चुनाव हुआ तो उनका जीतना मुश्किल होगा। जनता में भी यह फीडबैक घूम रहा था। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के कहने पर सभी विधायकों ने 'आप' सरकार को समर्थन दे दिया। तब शीला दीक्षित भी सक्रिय नहीं थीं। वे दिल से 'आप' को समर्थन देने के पक्ष में नहीं थीं। दिल्ली में इंडिया गठबंधन का कोई भविष्य नजर आ रहा है, इस सवाल के जवाब में संदीप ने कहा, दिल्ली से इसका कोई लेना देना नहीं है। यह गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर था। 
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'आप' का यह आरोप है कि कांग्रेस पार्टी, दिल्ली चुनाव में भाजपा को फायदा पहुंचा रही है, संदीप ने कहा, ये तो उनकी सोच है। हर पार्टी अपने लिए चुनाव लड़ती है। ऐसे तो हम भी कह सकते हैं कि आप ने 2013 में शीला के खिलाफ इसलिए चुनाव लड़ा था, क्योंकि उसे भाजपा को फायदा पहुंचाना था। लोकपाल का गठन और भ्रष्टाचार से लड़ाई, ऐसे मुद्दों पर आप का गठन हुआ था। आज ये दोनों मुद्दे कहां हैं, क्या कभी इस बाबत आप ने कुछ बताया है। 'आप' ने विकास से लोगों का ध्यान हटाने के लिए तीर्थ यात्रा, हज यात्रा, मौलवी को सम्मान राशि और पुजारी को सम्मान राशि, ऐसी बातों पर फोकस करना शुरु कर दिया। क्या आप ने कोई भ्रष्टाचार का मामला उजागर किया है। पार्टी के नेता खुद ही अपने बेईमानी के दलदल में फंसे हैं। पूर्व सीएम केजरीवाल कुछ माह पहले ही जेल से छूटे हैं। 


बाकी तो लोग, चुनाव में बताएंगे कि कौन कट्टर ईमानदार है और कौन बेईमान। दिल्ली सरकार द्वारा छूट और सम्मान राशि देना, इस सवाल पर संदीप दीक्षित ने कहा, 'आप', विकास नहीं कर रही। वह लोगों को आईसक्रीम खिला रहे हें, उनका ध्यान भटका दे रहे हैं। इस मामले में संदीप ने कहा, देखिये हम सब्सिडी के खिलाफ नहीं है। शीला दीक्षित की सरकार में लोगों को बेहद सस्ती बिजली मिलती थी। बिजली की दरों में साठ प्रतिशत तक सब्सिडी देते थे। पानी में तो नब्बे प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती थी। ऐसा कुछ न हो कि आम आदमी को यह लगे कि सब कुछ फ्री है। सब्सिडी तो सांकेतिक ही होनी चाहिए। ऐसा काम करें कि उपभोक्ताओं का स्वाभिमान बना रहे। खैर, हमारी सरकार बनने पर सब्सिडी तो हम भी देंगे, लेकिन विकास की बात ज्यादा करेंगे। पूरा पैसा सब्सिडी पर खर्च नहीं करेंगे। विकास के द्वारा लोगों को उस काबिल बनाएंगे। 


केजरीवाल और संदीप दीक्षित की मुलाकात कब हुई, इस संबंध में संदीप बोले, अन्ना आंदोलन के दौरान उनकी मुलाकात हुई थी। सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय को मैं भी अच्छी तरह जानता था। उन्होंने ही मुझे केजरीवाल के बारे में बताया था। केजरीवाल को मैगसेसे अवार्ड भी मिला था। वे कई बार मेरे दफ्तर में भी आए थे। मैं तभी से उन्हें जानता था। उस वक्त लोकपाल आंदोलन चल रहा था। दिल्ली में विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। लोगों के हितों के मद्देनजर हमने सोचा कि केजरीवाल टीम और यूपीए सरकार के बीच संवाद होना चाहिए। दिल्ली पर आंदोलन का गलत असर हो रहा है। उस वक्त मैं उनके बीच बातचीत का माध्यम बना था। संदीप ने कहा, तब शीला दीक्षित की कोई गलती नहीं थी। 


तब केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बना था तो उसके चक्कर में दिल्ली सरकार भी घिर गई। लोग तो पार्टी को वोट देते हैं। नाम तो पार्टी का होता है। दिल्ली में सरकार के खिलाफ माहौल बना तो कांग्रेस को उसका खामियाजा भुगतना पड़ा। हालांकि भ्रष्टाचार का कोई मामला साबित नहीं हो सका। अब केजरीवाल खुद को ईमानदार बता रहे हैं। वे सोचते हैं कि लोग उनका समर्थन करेंगे। लोग समझते हैं कि केजरीवाल मुख्यमंत्री बने तो वे दफ्तर में नहीं जा सकते। कोई फाइल साइन नहीं कर सकते। कोर्ट का फैसला आना बाकी है। कोई व्यक्ति खुद ही ईमानदारी का तमगा लगा ले तो उसे जायज नहीं ठहराया जा सकता। सब लोग खुद को ईमानदार ही बताते हैं। अब यह बात तो पांच फरवरी को लोग ही तय करेंगे कि कौन कट्टर ईमानदार है और कौन बेईमान। 

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