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RSS: शताब्दी वर्ष पर मेगा प्लान से क्यों पीछे हटा आरएसएस, अब क्या रहेगी संगठन की रणनीति?

सार

शताब्दी वर्ष पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजना क्या है, यह जानने से पहले यह जान लेते हैं कि संघ प्रमुख ने इस मुद्दे पर क्या कहा और उनका आशय क्या था?
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RSS - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के सौ वर्ष 2025 में पूरे हो जाएंगे। अब तक जानकारी मिल रही थी कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस शताब्दी वर्ष को बहुत भव्य तरीके से मनाने की तैयारी कर रहा है। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत भव्य कार्यक्रमों का आयोजन तय हुआ था। शताब्दी वर्ष में संगठन के बड़े विस्तार की भी योजना बनाई गई थी, जिसमें इसकी शाखाओं की संख्या को बढ़ाकर एक लाख तक करने की योजना थी, लेकिन अब जानकारी मिल रही है कि संघ ने अपने शताब्दी वर्ष पर बड़े और भव्य कार्यक्रमों की योजना फिलहाल टाल दी है।

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स्वयं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इससे संबंधित एक बयान नागपुर में दिया है। बड़ा प्रश्न यही है कि क्या संघ ने शताब्दी वर्ष पर होने वाले सभी कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है? यदि ऐसा है तो संघ ने यह निर्णय क्यों किया? अब शताब्दी वर्ष को लेकर संघ की योजना क्या है? यदि शताब्दी वर्ष मनाया जाएगा तो इसका स्वरूप क्या होगा? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है और इस मुद्दे पर फैलाए जा रहे सभी भ्रमों को दूर कर दिया है।  

मोहन भागवत ने क्या कहा?
शताब्दी वर्ष पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजना क्या है, यह जानने से पहले यह जान लेते हैं कि संघ प्रमुख ने इस मुद्दे पर क्या कहा और उनका आशय क्या था? दरअसल, 18 अप्रैल को एक कार्यक्रम में नागपुर पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपना शताब्दी वर्ष नहीं मनाएगा। वह अपनी कुछ उपलब्धियों का ढिंढोरा पीटने के लिए इस अवसर का उपयोग नहीं करना चाहता है। ऐसा वह अहंकार न बढ़ाने के लिए कर रहा है।  
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संघ की बड़ी उपलब्धि क्या है?
दरअसल, सामान्य लोग मानते हैं कि एक संगठन के तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी स्थापना के सौ साल में बहुत बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। इसमें अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जाता है। इसके अलावा अपनी विचारधारा के राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी को केंद्र की सत्ता तक पहुंचने में सहायता प्रदान करना, जनता के बीच सनातन धर्म-संस्कृति को बढ़ावा देना और लोगों के मन में हिंदू राष्ट्र की भावना को लेकर गौरव भाव पैदा करना अहम है। संघ का उद्देश्य समस्त हिंदू समुदाय को एक सूत्र में पिरोने के लिए दिन रात कार्य करना है। आज भी संघ जाति, वर्ग भेद को दूर करने और व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण को करने के अपने उद्देश्य में लगा हुआ है। 

लेकिन मोहन भागवत संतुष्ट नहीं
लेकिन इन उपलब्धियों के बाद भी मोहन भागवत इससे संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें लगता है कि इन उपलब्धियों को हासिल करने में बहुत अधिक समय लगा, जबकि इन्हें हासिल करने में इतना समय नहीं लगना चाहिए था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागपुर के अपने संबोधन में बड़प्पन का परिचय देते हुए कहा कि संगठन की उपलब्धियां बहुत छोटी हैं। 

उन्होंने कहा कि संघ ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उन्हें हासिल करने में इतना समय नहीं लगना चाहिए था। संभवतः ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हजार-पंद्रह सौ वर्ष की लंबी गुलामी ने लोगों में अपनी धर्म-संस्कृति को लेकर गौरव भाव कम कर दिया है। विदेशियों ने हमें अपनी ही सभ्यता-संस्कृति को गौरव योग्य न मानने की हीन भावना पैदा कर दी है। इससे हमें दूर होना होगा। हालांकि, उन्होंने माना कि पहले संघ के लिए कार्य करने की परिस्थितियां बहुत विपरीत थीं। लेकिन अब परिस्थितियां काफी अनुकूल हैं। उन्होंने कहा कि परिस्थिति कैसी भी हो, स्वयंसेवक को अपना कार्य करते रहना चाहिए।
   
क्या है संघ की योजना? 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर ने अमर उजाला को बताया कि संघ कभी दिखावे के लिए कोई कार्य नहीं करता। वह सतत समाज निर्माण की अपनी भूमिका निभाता रहता है। शताब्दी वर्ष को लेकर भी संघ की योजना इसी दृष्टि से आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष पर कार्यक्रमों का स्वरूप क्या हो और इसको किस तरह मनाया जाए, इस पर अभी विचार-विमर्श चल रहा है। जल्द ही इसका अंतिम स्वरूप तय कर लिया जाएगा और इसके बाद इसकी सूचना दी जाएगी। 

नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि इसके पहले भी आरएसएस के संस्थापक डॉ. हेडगेवार की जन्मशती जैसे कुछ बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। लेकिन इनका स्वरूप बेहद शांतिपूर्ण तरीके से संगठन का विस्तार करना और समाज का निर्माण करना था। शताब्दी वर्ष पर जो भी कार्यक्रम बनाए जाएंगे, उनके मूल में भी यही भावना समाहित रहेगी। 

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