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'मेरे जीवन के 12 साल कौन लौटाएगा?'

Tue, 21 Feb 2017 08:14 PM IST
माजिद जहांगीर / श्रीनगर से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
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मोहम्मद हुसैन फाजली के घर के पिछले वाले हिस्से में कई चीजें बिखरी पड़ी हैं, वैसे ही जैसे हुसैन और उनके परिवार की जिंदगी और चैन सुकून बीते 12 सालों से बिखरा हुआ था। श्रीनगर के सोरह में 43 साल के हुसैन के घर के अंदर जाते ही, वे कई लोगों के बीच कंबल में बैठे नजर आते हैं।
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वो लोगों को जेल में बिताए सालों की कहानी सुना रहे हैं। जो भी आता है तो हुसैन खड़े होकर उसे गले लगाते हैं। यहाँ आने वाले कई लोगों और अपने खानदान की नई पीढ़ी में से किसी को भी वह पहचानते नहीं हैं।

हुसैन और रफीक अहमद शाह को पिछले दिनों दिल्ली की एक निचली अदालत ने 2005 में दिल्ली में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के आरोपों से बरी कर दिया है। उन धमाकों में 68 लोग मारे गए थे। 
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12 साल मां-बाप की सेहत बिगड़ी हुई है

हुसैन को बेगुनाह होकर रिहा होने की खुशी तो है, लेकिन वे इस बात से सदमे में हैं कि उनके 12 साल जेल में रहने के दौरान उनके मां-बाप की सेहत बिगड़ गई। हुसैन का कहना था, "अब घर पहुंच कर मुझे लग रहा है कि मैंने क्या खोया।

घर पहुंचा तो मां को बिस्तर पर लेटा पाया, बाप के आंखों की रोशनी भी खत्म हो गई है।" मोहम्मद हुसैन फाजली अपने घर के जिस कमरे में बैठे हैं, वहां कोने में ताक पर रखा काले रंग का पुराना टेलीफोन रखा हुआ है।

हुसैन के अपने मां-बाप से संपर्क का एकमात्र जरिया था ये फोन। बीते 12 साल में हुसैन के मां-बाप कभी अपने बेटे को मिलने नहीं जा पाए, वे दिल्ली आने जाने का खर्चा नहीं उठा सकते थे। हुसैन बार-बार एक ही सवाल पूछते हैं, "मेरे 12 साल कौन वापस लौटाएगा?"

'शादी की उमर थी'

बेगुनाही के 12 साल जेल में काटने पर हुसैन पूछते हैं, "जिस तरह मुझे 12 साल के बाद जेल से बरी कर दिया गया, क्या बारह साल पहले ऐसा नहीं हो सकता था? मेरी जिन्दगी तो तबाह हो गई। जब गिरफ्तार किया गया तो मेरी शादी की उमर थी।" ये पूछने पर कि क्या जिन लोगों ने आपको गिरफ्तार किया था, उनके खिलाफ कारवाई होनी चाहिए या फिर आपको मुआवजा मिलना चाहिए।

वह कहते हैं, "मेरी मांग ये है कि जिन पुलिस वालों ने मुझे उठाया था, उनसे ये पूछा जाए कि मेरे साथ ऐसा क्यों किया गया?" जब हुसैन को गिरफ्तार किया गया था, वे उस समय 31 वर्ष के थे। घर में शादी की बातें हो रही थीं। अब हुसैन के पिता को इस बात की आशंका सता रही है कि बेटे पर जो दाग लगा है वो इतनी जल्दी मिटेगा नहीं।

उन्होंने कहा, "किस-किस को समझाएं कि मेरा बेटा बेगुनाह है।" हालांकि उन्हें इस बात की खुशी है कि उन्होंने मरने से पहले बेटे को देख लिया। वह कहते हैं, "बस ये एक सपना था की मरने से पहले बेटे को देख लें, जो पूरा हो गया।"
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चंद मिनट की पूछताछ

हुसैन की माँ फातिमा बेगम को लगता है कि बेटे का नया जन्म हुआ है। उन्होंने बताया, "ऐसा लगता है कि बेटा घर वापस आकर एक बार फिर मेरे कोख से जन्मा है। बेटे के बगैर 12 साल दिल पर पत्थर रख कर गुजारे हैं।" हुसैन को अपने घर से ये कहकर गिरफ्तार किया गया था कि चंद मिनटों के पूछताछ के बाद छोड़ दिया जाएगा। हुसैन को ये भी नहीं पता था कि उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया और कहां ले जाया गया?

तब वे शॉल बनाने का काम करते थे और महीने में ढाई हजार रूपया तक कमा लेते थे। उन्हें कई दिनों के बाद एक पत्रकार से पता चला कि वे दिल्ली में हैं और दिल्ली धमाकों के आरोपों में उन्हें दिल्ली लाया गया और फिर उन्हें 12 साल जेल में काटने पड़े। जिस दिन उन पर लगे आरोपों पर अदालत में फैसला होना था,

उस दिन के बारे में हुसैन कहते हैं, "वो मेरी कुस्मत का फैसला था, खुदा पर भरोसा था और इंसाफ की जीत हुई।" हालांकि हुसैन में इस बात का गुस्सा है कि उन्हें कश्मीरी मुसलमान होने के चलते पकड़ा गया था, वे कहते हैं, "हमें इसलिए गिरफ्तार किया गया कि हम कश्मीरी मुसलमान हैं।" हालांकि अब हुसैन और उनके परिवार वालों को नई जिंदगी की शुरुआत की उम्मीद है।
 
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