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पश्चिम बंगाल के सियासी दंगल से किसे मिलेगा लाभ?

Mon, 04 Feb 2019 08:29 PM IST
Amit Digital अमित शर्मा, नई दिल्ली
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ममता बनर्जी - फोटो : ANI
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पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 'संविधान बचाओ सत्याग्रह' धरने पर बैठी हैं। वे प्रधानमंत्री और भाजपा पर वार कर रही हैं। ममता बनर्जी का आरोप है कि केंद्र सरकार सुरक्षा एजेंसियों का दुरुपयोग अपने राजनीतिक हित के लिए कर रही है। उन्हें इस मुद्दे पर कोलकाता से लेकर संसद तक विपक्ष का साथ मिला हुआ है। वहीं, भाजपा इसे 'भ्रष्ट नेताओं' का गठबंधन बता रही है जो इसके जरिए अपना राजनीतिक वजूद बचाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में अहम सवाल यह है कि सीबीआई बनाम ममता बनर्जी के इस प्रकरण से किसे और कितना लाभ मिल सकता है? 

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पश्चिम बंगाल के एक भाजपा नेता के मुताबिक उनकी कोशिश बंगाल की लड़ाई को दो ध्रुवीय करने की है। पार्टी का मानना है कि अगर पश्चिम बंगाल की लड़ाई सीधे नरेंद्र मोदी बनाम ममता बनर्जी के मुद्दे पर होती है तो उसे इसका बड़ा सियासी लाभ मिल सकता है। यही कारण है कि भाजपा बंगाल में लगातार वोटों के ध्रुवीकरकण की कोशिश कर रही है। अगर बंगाल में वोटों का ध्रुवीकरण धार्मिक आधार पर होता है तो भाजपा को इसका सीधा सियासी फायदा मिलेगा। 

पार्टी ने इसी रणनीति के तहत यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी मैदान में उतार दिया है। अगले कुछ दिनों में पार्टी यहां सघन प्रचार करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा भाजपा के स्टार नेताओं की लगातार सभाएं भी आयोजित की जा रही हैं। पार्टी नेता कैलाश विजयवर्गीय कहते हैं कि ममता बनर्जी जितना ही भाजपा की रैलियों को रोकने की कोशिश करेंगी, जनता के बीच उनकी छवि उतनी ही खराब होगी। और इसका लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा।  
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ममता बनर्जी को मिलेगा बल

ममता बनर्जी खुद एक चतुर राजनेता हैं। वे आंदोलन से निकली हैं और ऐन लोकसभा चुनाव के पहले इस प्रकरण का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही हैं। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह स्पष्ट कह दिया कि ममता बनर्जी इस मामले के जरिए खुद को विपक्ष की नेता के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं। 

जिस तरह से ममता बनर्जी को अरविंद केजरीवाल, चंद्राबाबू नायडू और अखिलेश यादव जैसे नेताओं का साथ मिला है, उससे वे निःसंदेह एक मजबूत नेता के तौर पर उभरी हैं। इसके पूर्व भी कोलकाता की रैली के दौरान भी पूरे देश के विपक्षी नेताओं को एक मंच पर लाकर अपनी राजनीतिक हैसियत दिखाई थी। विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार ममता बनर्जी ने गैर भाजपाई खेमे का नेतृत्व करने वाली नेता के रुप में खुद को स्थापित करने में सफलता पाई है। 

राज्य की जनता में भी उनकी विश्वसनीयता बढ़ सकती है जिसका फायदा उन्हें लोकसभा चुनाव में मिल सकता है। पिछले लोकसभा चुनाव में 42 में से 34 सीटें जीतकर ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में अपनी एकछत्र धमक साबित कर दी थी। अगर इस बार भी लोकसभा चुनाव में उनकी यह राजनीतिक सफलता बरकरार रहती है तो चुनाव बाद के समीकरणों में उनकी मजबूत दावेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता।
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