राज्यसभा में पेश होने जा रहे वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) विधेयक के लागू होने के बाद सभी वस्तुएं (कुछ आवश्यक वस्तुओं को छोड़) या सेवाएं जीएसटी के दायरे से बाहर नहीं रह पाएंगी।
यहां तक कि अगर आप अपने मकान को लीज पर देते हैं, तब भी आप पर जीएसटी लागू होगा। आप किसी को अपना टेलीविजन देकर उससे फ्रिज लेते हैं, तब भी जीएसटी लागू होगा।
फल-सब्जी को छोड़ ब्रांडेड चावल, आटा, मैदा, बेसन जैसी चीजें भी जीएसटी के दायरे में आएंगी। हालांकि खुले तौर पर बेचे जाने वाले अनाज जैसे कि दाल, चावल, चीनी पर जीएसटी लागू होगा या नहीं, इस पर अभी कारोबारियों के बीच असमंजस है।
कारोबारियों के मुताबिक, जीएसटी को लेकर उनके समक्ष अब भी कई चुनौतियां बरकरार हैं।
किसको होगा फायदा
जीएसटी
विभिन्न प्रकार के कर, एक कर में तब्दील हो जाएंगे। इससे कागजी कार्रवाई कम हो जाएगी, प्रक्रियाएं कम हो जाएंगी। करों में कमी से चीजें सस्ती होंगी तो उनकी बिक्री बढ़ेगी।
इससे ग्राहकों, राज्य, केन्द्र सरकार और करोबारी जगत सबको फायदा होने की बात कही जा रही है। केन्द्रीय वित्त मंत्रालय का मानना है कि इसके लागू होने से अर्थव्यवस्था की विकास दर अपने तेज हो जाएगी।
हम जानने की कोशिश करते हैं कि इससे किसको क्या लाभ होगा: ग्राहकों को लाभ अभी देखा जाता है कि कहीं कोई सामान महंगा तो कहीं सस्ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि राज्य और केंद्र सरकारें चीजों पर अलग अलग तरह के टैक्स लगाती है।
एक ही सामान पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग कर की दर है। इसके लागू हो जाने से देश केसभी राज्यों में एक वस्तु पर एक समान कर होगा। इससे दैनिक इस्तेमाल की ढेरों वस्तुएं सस्ती होंगी तो महंगे मोबाइल हैंडसेट, लक्जरी कार, सिगरेट एवं शराब महंगी हो सकती हैं।
ऐसा इसलिए, क्योंकि उन पर करों की दर बढ सकती है। इसी तरह से हम बहुत सारी सेवाओं का उपयोग करते हैं और इन पर सर्विस टैक्स भी चुकाते हैं। टेलीकॉम, टिकट बुकिंग सेवाएं भी इस कानून के दायरे में आएंगी।
अभी पूरे देश में सेवाओं पर टैक्स की दर 14 फीसदी है और समूचे देश के लिए समान है लेकिन वस्तुओं के लिए टैक्स की दर अलग-अलग है। इसलिए इन सेवाओं के महंगी होने की आशंका है।
आभूषण विक्रेताओं को फायदा सोने के आभूषण विक्रेताओं को जीएसटी लागू होने के बाद उत्पाद कर नहीं देना पड़ेगा। इससे आभूषण सस्ते होंगे। अभी 15 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री करने पर उन्हें एक फीसदी की दर से उत्पाद कर देना होता है।
अनाज व्यापारी असमंजस मे लॉरेंस रोड स्थित दाल के थोक व्यापारी, अशोक गुप्ता कहते हैं कि हमें अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है कि दाल जैसी चीजों की बिक्री जीएसटी के दायरे में आएगी या नहीं।
राज्य पर असर
जीएसटी बिल
- फोटो : ANI
राज्य पर असर इस कानून के लागू होने से सप्लाई चेन की दिक्कतें दूर होंगी। चुंगी, प्रवेश कर एवं कई राज्य कर खत्म होने से अधिकतर राज्य राजस्व में कमी होने का हवाला दे रही हैं।
इससे विकसित राज्यों को ज्यादा नुकसान होने की बात कही जा रही है। लेकिन वैसे राज्य जहां अभी मैनयूफैक्चरिंग गतिविधियां नहीं के बराबर हैं, उन्हें जीएसटी से बेहद फायदा होगा।
केन्द्र सरकार के लिए यह कानून विकास की नई दौर का दरवाजा खोलेगा। इससे पूरा देश एक बाजार बन जाएगा, जिससे केन्द्र सरकार का ईज आफ डूइंग बिजनेस का नारा भी सार्थक होगा।
इससे सरकार को कारोबारियों पर नजर रखना आसान हो जाएगा इसलिए कर चोरी पर लगाम लगेगी। इससे पारदर्शिता भी बढेगी।
कारोबारियों पर असर जीएसटी लागू होने पर देश में किसी भी जगह से खरीददारी करने पर एक समान और केवल एक जीएसटी टैक्स ही लगेगा।
वर्तमान व्यवस्था में वस्तुओं के निर्माण और वितरण की प्रक्रिया में अंतर के कारण देश भर में टैक्स व्यवस्था में अंतर है। जब कर प्रणाली आसान होगी तो मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बल मिलेगा।
इससे केंद्र के मेक इन इंडिया के नारों को भी बल मिलेगा। विदेशी कंपनियों को भी इससे फायदा होने की बात कही जा रही है, क्योंकि ये कंपनियां भारतीय उद्योगों के साथ व्यापार करते समय टैक्स की गणना करने में राहत महसूस करेंगी।
इस कानून के लागू होने से सप्लाई चेन की दिक्कतें दूर होंगी। चुंगी, प्रवेश कर एवं कई राज्य कर खत्म होने से अधिकतर राज्य राजस्व में कमी होने का हवाला दे रही हैं।
इससे विकसित राज्यों को ज्यादा नुकसान होने की बात कही जा रही है। लेकिन वैसे राज्य जहां अभी मैनयूफैक्चरिंग गतिविधियां नहीं के बराबर हैं, उन्हें जीएसटी से बेहद फायदा होगा।
केन्द्र सरकार के लिए यह कानून विकास की नई दौर का दरवाजा खोलेगा। इससे पूरा देश एक बाजार बन जाएगा, जिससे केन्द्र सरकार का ईज आफ डूइंग बिजनेस का नारा भी सार्थक होगा। इससे सरकार को कारोबारियों पर नजर रखना आसान हो जाएगा इसलिए कर चोरी पर लगाम लगेगी।
वर्तमान व्यवस्था में वस्तुओं के निर्माण और वितरण की प्रक्रिया में अंतर के कारण देश भर में टैक्स व्यवस्था में अंतर है। जब कर प्रणाली आसान होगी तो मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बल मिलेगा। इससे केंद्र के मेक इन इंडिया के नारों को भी बल मिलेगा।
विदेशी कंपनियों को भी इससे फायदा होने की बात कही जा रही है, क्योंकि ये कंपनियां भारतीय उद्योगों के साथ व्यापार करते समय टैक्स की गणना करने में राहत महसूस करेंगी।
जीएसटी लागू करने की प्रक्रिया
जीएसटी
जीएसटी विधेयक, संविधान संशोधन विधेयक है इसलिए इसे संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित होना जरूरी है। इसके साथ ही कम से कम देश की 50 फीसदी राज्य विधानसभाओं में इसे अनुसमर्थन मिलना जरूरी है।
राज्य की विधानसभाओं से इसे पारित करवाने के लिए सामान्य बहुमत चाहिए। इसके बाद यह वापस आएगा और कानून मंत्रालय इसे अधिसूचित करेगा।
इसके बाद इसके अलग अलग पैराग्राफ से अलग अलग कानून बनाया जाएगा ताकि जीएसटी को लागू किया जा सके। ऐतिहासिक परिपेक्ष्य भारत में जीएसटी की बात वर्ष 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने शुरू की थी।
उसने पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता की अध्यक्षता में राज्य केवित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति -इमपावर्ड कमेटी- का गठन किया था। इस कमेटी की जिम्मेदारी जीएसटी पर सभी राज्यों को बीच सहमति बनाने की है।
वर्ष 2006 में मनमोहन सरकार के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बजट में कहा था कि एक अप्रैल 2010 से जीएसटी लागू किया जाएगा। इसी हिसाब से काम चल रहा है।
इमपावर्ड कमेटी ने नवंबर 2009 में जीएसटी पर पहला डिस्क्शन पेपर जारी किया। वर्तमान स्थिति इस समय इसे लोक सभा से तो पारित करा लिया गया है, लेकिन राज्य सभा से पारित नहीं हो पाया है।
जहां तक राज्यों की बात है तो कुछ मसलों को छोड कर अन्य पर लगभग सहमति बन गई है।
क्या हैं चुनौतियां
जीएसटी बिल
जीएसटी दो प्रकार के होंगे- केंद्र व राज्य जीएसटी। जाहिर हैं इन दोनों के संचालन के लिए अलग-अलग प्राधिकरण होंगे। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव, प्रवीन खंडेलवाल कहते हैं कि जीएसटी की प्रस्तावना में लिखा है कि यह सरलीकृत कर प्रणाली होगी।
ऐसे में यहां एकल कर व एकल प्राधिकरण की व्यवस्था होनी चाहिए। इनपुट क्रेडिट मिलने में होगी दिक्कत एक कारोबारी द्वारा दूसरे कारोबारी से माल खरीदने के बाद पहले वाले कारोबारी को खरीदी गई वस्तु पर दिए गए कर की राशि तभी वापस मिलेगी, जब माल बेचने वाला कारोबारी टैक्स रिटर्न भर देगा।
प्लेस ऑफ सप्लाइंग खंडेलवाल कहते हैं दिल्ली से अगर कोई माल उत्तर प्रदेश भेजा जाता है तो टैक्स उत्तर प्रदेश को मिलेगा या दिल्ली को, यह स्पष्ट नहीं है।
जेल जाने का प्रावधान कारोबारियों को जेल जाने के प्रावधान पर भी आपत्ति है। उनका कहना है कि बिना सरकारी अधिकारी की मिलीभगत के जीएसटी या किसी भी प्रकार के कर की हेराफेरी नहीं की जा सकती है। ऐसे में सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
क्या है जीएसटी
जीएसटी
- फोटो : gjh
वस्तु एवं सेवा कर -जीएसटी- वह अप्रत्यक्ष कर प्रणाली है, जिसमें अभी केन्द्र और राज्यों में लगायी जा रही सभी अप्रत्यक्ष कर समाहित हो जाएगी। यह वस्तु एवं सेवाएं, दोनों पर लागू होगा।
इस समय राज्य सरकार जो वैट या बिक्री कर लगाती हैं, वह सिर्फ वस्तुओं पर ही लागू होता है, सेवाओं पर नहीं। सेवा पर केंद्र सरकार सेवा कर लगाती है।
इसके अलावा केन्द्र सरकार केन्द्रीय उत्पाद शुल्क और कुछ अन्य शुल्क भी वसूलती है। सरकार की योजना है कि जीएसटी लागू होने से केन्द्र और राज्य सरकार के हर तरह के अप्रत्यक्ष कर हट जाएंगे और सिर्फ जीएसटी ही लागू होगा।
इससे पूरा देश एकीकृत बाजार होगा। किसको रिप्लेस करेगा इस समय केन्द्र सरकार केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, मेडिशिनल एंड टायलेट प्रिपरेशन -एक्साइज डयूटी- कानून 1955 के तहत लगने वाला उत्पाद शुल्क, केन्द्रीय सरचार्ज एवं सेस आदि लगाती है।
इसी तरह राज्य सरकारें वैट या बिक्री कर, मनोरंजन कर, सीएसटी, चुंगी या प्रवेश शुल्क, लक्जरी कर, स्टेट सेस और सरचार्ज लगाती है। जीएसटी लागू होने से तमाम अप्रत्यक्ष कर इसमें समाहित हो जाएंगे।