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WHO: दुनियाभर में हर तीन में से एक महिला लैंगिक हिंसा की शिकार, घरेलू हिंसा के खिलाफ भारत की पहल काबिल-ए-तारीफ

Thu, 28 Nov 2024 05:01 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, नई दिल्ली

सार

डब्ल्यूएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक सायमा वाजेद ने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में लिंग आधारित हिंसा को खत्म करने के लिए की गई कोशिशों में भारत का घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम (2005), इंडोनेशिया का यौन हिंसा अपराध कानून (2022) और कई देशों में वन-स्टॉप सेंटर और हेल्पलाइन जैसी सहायता सेवाएं काबिल-ए-तारीफ है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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दुनियाभर में हर तीन में से एक महिला अपने जीवन में कम से कम एक बार शारीरिक या यौन अंतरंग साथी की हिंसा झेलती हैं। यह लैंगिक हिंसा घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, बाल विवाह और डिजिटल जैसे कई रूपों में होती है। यह जानकारी डब्ल्यूएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक सायमा वाजेद ने दी।

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मौका था विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से महिलाओं के खिलाफ हिंसा समाप्त करने के 16 दिवसीय अभियान के शुरुआत का। वाजेद ने कहा कि इस साल 10 दिसंबर तक चलने वाला अभियान खास है। यह मार्च 2025 में महिलाओं की स्थिति पर आयोग (सीएसडब्ल्यू) की ओर से आयोजित बीजिंग घोषणापत्र और महिलाओं पर कार्रवाई के मंच की आगामी 30वीं वर्षगांठ से जुड़ा है। 1995 में 189 सदस्य देशों के दस्तखत वाला बीपीओए महिला अधिकारों और लैंगिक समानता के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक नीति ढांचा है। इसकी समीक्षा 2025 में की जाएगी। 

समाज बने अधिक सशक्त और लचीला
वाजेद ने इन समस्याओं से निपटने के लिए 4पी दृष्टिकोण अपनाने का प्रस्ताव रखा। इसमें महिलाओं की सेहत, शिक्षा और स्वच्छता में निवेश बढ़ाना, आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में बाधाओं को दूर करना, संवेदनशील आबादी की निगरानी में मजबूती लाना और आंकड़ों पर आधारित नीतियां सुनिश्चित करना शामिल हैं।
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घरेलू हिंसा के खिलाफ भारत की पहल काबिल-ए-तारीफ
वाजेद ने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में लिंग आधारित हिंसा को खत्म करने के लिए की गई कोशिशों में भारत का घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम (2005), इंडोनेशिया का यौन हिंसा अपराध कानून (2022) और कई देशों में वन-स्टॉप सेंटर और हेल्पलाइन जैसी सहायता सेवाएं काबिल-ए-तारीफ है। बावजूद, चुनौतियां बनी हुई हैं। यह क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं के लिए संवेदनशील है। यहां लैंगिक असमानता अधिक है और राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सीमित है। यही वजह है कि क्षेत्र में सेहत के सतत विकास लक्ष्य 3 (एसडीजी3) और लैंगिक समानता लक्ष्य 5 (एसडीजी5) जैसे वैश्विक लक्ष्यों की प्रगति पर असर पड़ता है।

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