डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि आज टीबी से मुक्त क्षेत्र के हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पहले से कहीं अधिक तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। ये रोग लाखों लोगों को बीमारी और मृत्यु, गरीबी और निराशा से ग्रस्त कर रहा है।
डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया से टीबी को समाप्त करने के प्रयासों को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने गुरुवार को ये बात कही। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि वैश्विक स्वास्थ्य निकाय ने गांधीनगर घोषणा को भी अपनाया है।
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डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में टीबी को समाप्त करने के लिए एक मंत्रिस्तरीय बैठक में अपने संबोधन में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि आज टीबी से मुक्त क्षेत्र के हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पहले से कहीं अधिक तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। ये रोग लाखों लोगों को बीमारी और मृत्यु, गरीबी और निराशा से ग्रस्त कर रहा है।
इस क्षेत्र की एक प्रमुख प्राथमिकता तपेदिक उन्मूलन की दिशा में प्रगति और 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में तपेदिक पर संयुक्त राष्ट्र की उच्च स्तरीय बैठक से पहले दो दिवसीय कार्यक्रम के अंत में गांधीनगर घोषणा पत्र को अपनाया गया।
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इस घोषणा पत्र में टीबी के उन्मूलन के लिए अलग-अलग हितधारकों के बीच कोशिशों के तालमेल पर जोर दिया गया है। साथ ही टीबी और अन्य प्राथमिकता वाली बीमारियों को समाप्त करने की दिशा में हो रही प्रगति की निगरानी के संबंध में उच्च स्तरीय बहुक्षेत्रीय आयोग की स्थापना की भी जरूरत बताई गई है।
अपने संबोधन में डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक ने यह भी कहा कि टीबी को लेकर ये उच्च स्तरीय बहुक्षेत्रीय आयोग उत्तरदायी स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज तथा स्वास्थ्य सुरक्षा को आगे बढ़ाने में भी मदद कर सकता है।
डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक पूनम खेत्रपाल सिंह ने यह भी कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में टीबी के उन्मूलन मिशन के लिए आवंटन साल 2022 में 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें 60 प्रतिशत घरेलू स्रोतों से था। उन्होंने कहा कि बावजूद इसके इस मिशन की सफलता के लिए, हमें सालाना कम से कम तीन अरब अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता है। ये धनराशि पोषण संबंधी सहायता जैसे प्रमुख सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को बनाए रखने में भी मदद करेगा।