इसी दिन सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया की जयंती भी थी और ज्योतिरादित्य इस मौके पर ग्वालियर जाने वाले थे। परंतु वह लोधी होटल गए और जफर से मिलकर चाय पर चर्चा की। इसके बाद दोनों नेता होटल से कौटिल्य मार्ग स्थित गुजरात भवन पहुंचे। गुजरात भवन से गृहमंत्री अमित शाह की कार में बैठकर तीनों नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए 7 लोक कल्याण मार्ग पहुंचे।
इस मुलाकात के बाद जफर और सिंधिया दोनों को ही वापस गुजरात भवन लाकर छोड़ दिया गया। इस घटनाक्रम से बंगलूरू में ठहरे मध्यप्रदेश के सिंधिया के समर्थक विधायकों को मौके और सियासत की नजाकत भांपने में देर नहीं लगी। हालांकि बुधवार को जब सिंधिया ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली तो इस बात ने कांग्रेस पार्टी ही नहीं और भी कई लोगों को चौंका दिया।
लेकिन आखिरकार उन्होंने इस तरह से परिवर्तन और एक 'निवेश की कहानी' लिख डाली। हालांकि इसी के साथ कांग्रेस का सिंधिया राजघराने से राजनैतिक संबंध भी खत्म हो गए। बहरहाल, सिंधिया के पार्टी परिवर्तन में एक व्यक्ति जिनकी सबसे बड़ी भूमिका रही वह जफर इस्लाम ही हैं।