फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीएम मोदी को झालमुड़ी देने वाले विक्रम शॉ कौन?: SPG कमांडर बताने का दावा हुआ फुस्स, दुष्प्रचार का पर्दाफाश

Wed, 22 Apr 2026 11:10 PM IST
Himanshu Singh Chandel आईएएनएस, कोलकाता

सार

पश्चिम बंगाल के झारग्राम में प्रधानमंत्री मोदी के झालमुड़ी खाने की घटना पर सोशल मीडिया पर फर्जी दावा फैलाया गया कि दुकानदार एक एसपीजी अधिकारी था। हालांकि, जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा निकला है। दुकानदार विक्रम शॉ ने खुद बताया कि वह एक साधारण विक्रेता है। यह मुलाकात पूरी तरह वास्तविक और अनस्क्रिप्टेड थी।
विज्ञापन
कौन है पीएम मोदी को झालमुड़ी खिलाने वाला दुकानदार? - फोटो : एक्स/@narendramodi
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सोशल मीडिया की दुनिया में अक्सर सच और झूठ के बीच की लकीर धुंधली हो जाती है। पश्चिम बंगाल के झारग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक छोटे से पड़ाव ने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी। पीएम मोदी ने सड़क किनारे एक ठेले पर रुककर झालमुड़ी का स्वाद चखा था। 
विज्ञापन


इसके तुरंत बाद इंटरनेट पर कुछ तस्वीरें और मीम्स वायरल होने लगे, जिनमें यह दावा किया गया कि झालमुड़ी बेचने वाला कोई साधारण दुकानदार नहीं, बल्कि भेस बदलकर खड़ा एक एसपीजी अधिकारी था। लेकिन अब इस पूरी कहानी का सच सामने आ गया है और यह साफ हो गया है कि वायरल हो रहे दावे पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठे हैं।

झालमुड़ी बेचने वाला सच में कोई सुरक्षा अधिकारी था?
सोशल मीडिया पर जिस दावे ने तूल पकड़ा था, वह पूरी तरह से एक फर्जी नैरेटिव यानी गलत कहानी पर आधारित था। असल में, वह व्यक्ति कोई सुरक्षा अधिकारी नहीं बल्कि एक असली रेहड़ी-पटरी वाला दुकानदार था। वायरल पोस्ट में दो अलग-अलग तस्वीरों को जोड़कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई थी।
विज्ञापन


एक तस्वीर में असली दुकानदार दिख रहा था, जबकि दूसरी तस्वीर में एक एसपीजी अधिकारी की पुरानी स्टॉक फोटो इस्तेमाल की गई थी। यहां तक कि एआई चैटबॉट "ग्रोक" ने भी स्पष्ट किया कि यह केवल एक व्यंग्य वाला मीम है और दोनों तस्वीरों में दिख रहे लोग अलग-अलग हैं। यह महज एक राजनीतिक तंज था जिसे सच की तरह पेश किया गया।

दुकानदार ने अपनी मुलाकात के बारे में क्या बताया?
इस दुकानदार की पहचान विक्रम शॉ (कुछ रिपोर्टों में दीपक कुमार) के रूप में हुई है। विक्रम ने इस घटना के बारे में बताया कि वह प्रधानमंत्री के अचानक उसके स्टाल पर रुकने से दंग रह गया था। विक्रम के लिए यह किसी सपने जैसा था कि देश के प्रधानमंत्री ने उसकी छोटी सी दुकान पर आकर न केवल झालमुड़ी खाई, बल्कि उसके जीवन और हाल-चाल के बारे में भी पूछा। 

ये भी पढ़ें- जुबीन गर्ग मौत मामला:  'पति निर्दोष, गलत तरीके से फंसाया गया', आरोपी की पत्नी का दावा

विक्रम ने बताया कि वह बहुत कम पैसे कमाकर अपने परिवार का गुजारा करता है और उसने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा पल उसके जीवन में आएगा। उसने बाद में मजाक में यह भी कहा कि उसे इस बात का मलाल है कि वह प्रधानमंत्री का ऑटोग्राफ नहीं ले पाया।

प्रधानमंत्री और दुकानदार के बीच क्या बातचीत हुई?
विक्रम शॉ ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सबसे पहले उसका नाम पूछा और बड़े ही सहज अंदाज में झालमुड़ी बनाने को कहा। जब झालमुड़ी बनकर तैयार हो गई, तो पीएम मोदी ने उसकी कीमत पूछी। विक्रम ने प्रधानमंत्री से पैसे लेने से मना कर दिया था, लेकिन पीएम ने जिद की और झालमुड़ी के पैसे चुकाए।

मौके पर मौजूद लोगों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि यह पूरी मुलाकात अचानक हुई थी और इसमें कुछ भी पहले से तय नहीं था। प्रधानमंत्री वहां के स्थानीय लोगों से बहुत ही साधारण तरीके से मिले और उनके साथ हंसी-मजाक भी किया।

कैसे सोशल मीडिया पर फैलाई गई यह भ्रामक खबर?
प्रधानमंत्री के वहां से निकलते ही इंटरनेट पर मीम्स की बाढ़ आ गई थी। दो तस्वीरों को अगल-बगल रखकर यह दावा किया जाने लगा कि दुकानदार के हाव-भाव और चेहरा सुरक्षा अधिकारियों से मिलते हैं।
विज्ञापन


इस गलत सूचना को इस तरह फैलाया गया कि साधारण लोग भी इसे सच मानने लगे। लेकिन जमीनी हकीकत यह थी कि वह एक छोटी सी जगह का आम दुकानदार था, जिसे राजनीति और सोशल मीडिया के दावों से कोई लेना-देना नहीं था। यह घटना सिखाती है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती और बिना जांच-परख के किसी भी खबर पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

ये भी पढ़ें- 
विज्ञापन
Who is Vikram Shaw man who served Jhalmuri to PM Modi Claim SPG Commander falls flat disinformation exposed
Next
AU ऐप में पढ़ें