चीनी सरकार के दावे से विशेषज्ञ सहमत नहीं
चीनी सरकार के दावे से उलट विशेषज्ञों का मानना है कि पेशेंट जीरो का मीट मार्केट से कोई लेना-देना नहीं था। लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना का पहला मामला एक दिसंबर 2019 को ही सामने आ गया था। जिस व्यक्ति में ये संक्रमण पहली बार पाया गया उसका सी-फूड मार्केट से कोई संपर्क नहीं था।
रिपोर्ट पर यकीन किया जाए तो यह तारीख वुहान में कोराना के फैलने से काफी पहले की है। ऐसे में चीनी सरकार के दावों पर उंगली उठनी लाजिमी हैं। फरवरी में चीनी मीडिया में छपी एक रिपोर्ट में भी कहा था कि कोरोना की उत्पत्ति का केंद्र वुहान का सी-फूड मार्केट नहीं है।
चीन में पहले ही फैल चुका था संक्रमण
चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस और चाइनीज इंस्टिट्यूट ऑफ ब्रेन के रिसर्च में यह दावा किया गया था। डॉ. यू वेनबिन की अगुवाई में डॉक्टरों की एक टीम ने जिनोमिक डाटा के विश्लेषण में पाया कि सी-फूड मार्केट से पहले ही कोरोना का संक्रमण फैल चुका था। इस विश्लेषण में तो कोरोना की शुरुआत को नवंबर महीने से पहले की बताई गई है।
चीनी प्रशासन और विशेषज्ञों की बीच मतभेद
चीनी प्रशासन और विशेषज्ञों की बीच पेशेंट जीरो को लेकर अभी भी मतभेद है। माना जा रहा है कि कोरोना से संक्रमित हुए पहले व्यक्ति की तलाश के साथ ही इसके इलाज को लेकर भी बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है। इससे ये भी पता लगाया जा सकेगा कि वायरस की शुरुआता कब, कहां और कैसे हुई।
कैसे फैला वायरस? ठोस जानकारी नहीं
कोरोनावायरस की शुरुआत को लेकर अभी तक कई तरह के शोध सामने आए हैं। सबसे पहले शोध में यह बताया गया था कि ये वायरस चीन के जहरीले सांप से विकसित हुआ है। बाद में इसकी उत्पत्ति का कारण चमगादड़ को माना गया। हालांकि, अब तक शोधकर्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन अभी शुरुआती राय पर ही टिका हुआ है और उसका मानना है कि ये संक्रमण किसी जहरीले जानवर से ही इंसानों में फैला है।