हरियाणा विधानसभा चुनाव के दोपहर तक के नतीजों से ऐसा लगा मानों राज्य की सत्ता की चाबी भाजपा के हाथों से निकल गई और कांग्रेस की वापसी होने वाली है। इस बीच केवल 10 महीने पुरानी जननायक जनता पार्टी (जजपा) बेहद निर्णायक भूमिका में नजर आने लगी। कांटे की टक्कर के बीच कांग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा दावा कर रहे थे कि साथियों के साथ मिलकर मजबूत सरकार बनाएंगे। लेकिन देर शाम तक सबकुछ बदल गया। कई निर्दलीयों ने भाजपा के साथ जाने के संकेत दिए।
अब स्थित स्पष्ट हो चुकी है कि सरकार किसकी बनेगी। पहले माना जा रहा था कि जिसे दुष्यंत चौटाला चाहेंगे वही मुख्यमंत्री बनेगा, लेकिन अब ऐसा नहीं है। निर्दलीयों के साथ मिलकर भाजपा दोबारा सत्ता पर काबिज हो जाएगी। दुष्यंत की किंगमेकर बनने की इच्छा कम से कम इन समीकरणों की वजह से तो पूरी होती नहीं दिख रही है।
कांग्रेस को मिली सीटों की संख्या ऐसी है कि वो केवल जजपा का समर्थन हासिल करके भी सरकार नहीं बना सकती है। निर्दलीयों और जजपा को साथ लेकर कांग्रेस सत्ता तक पहुंच सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। निर्दलीय भाजपा के पाले में चले गए हैं।