फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

सियासत का नया चेहरा: 30 साल की सर्विस में 54 तबादले झेलने वाले कौन हैं अशोक खेमका? जिनकी आप में जाने की है चर्चा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Mon, 14 Mar 2022 05:11 PM IST

सार

हरियाणा में 2024 में विधानसभा चुनाव होने हैं और इसी चुनाव को ध्यान में रखकर खेमका की सियासत में एंट्री होने के कयास लगाए जा रहे हैं। अपनी ईमानदारी और भ्रष्टाचार विरोधी तेवर की वजह से ही अशोक खेमका हरियाणा में काफी लोकप्रिय हैं।  

 
विज्ञापन
विज्ञापन
अरविंद केजरीवाल और अशोक खेमका - फोटो : Amar Ujala
आम आदमी पार्टी के पंजाब विधानसभा में शानदार और ऐतिहासिक जीत के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के विस्तार पर भी तेजी से काम शुरू कर दिया है। पार्टी की नजर अब पंजाब के बाद नजदीकी राज्य हरियाणा पर है। पार्टी ने अगले कुछ माह के भीतर होने वाले शहरी निकाय चुनाव लड़ने का एलान किया है। 

यह इस बात का संकेत है कि अरविंद केजरीवाल अब अपने गृह राज्य हरियाणा को लेकर काफी गंभीर हैं। कहा जा रहा है कि ऐसे में केजरीवाल इस राज्य से अपने उस मित्र को पार्टी में शामिल कराना चाहते हैं जो कॉलेज के दिनों में उनके साथी थे।


बताया जा रहा है कि हरियाणा के तेज तर्रार और अक्सर विवादों में रहने वाले आईएएस अधिकारी अशोक खेमका केजरीवाल के नए सारथी हो सकते हैं और वे पार्टी के प्रिंसिपल एडवायजर बनाए जा सकते हैं। खेमका और अरविंद केजरीवाल आईआईटी खड़गपुर में साथ पढ़ चुके हैं।

हरियाणा में 2024 में विधानसभा चुनाव होने हैं और इसी चुनाव को ध्यान में रखकर खेमका की सियासत में एंट्री होने जा रही है। अपनी ईमानदारी और भ्रष्टाचार विरोधी तेवर की वजह से ही अशोक खेमका हरियाणा में काफी लोकप्रिय हैं।  

चर्चा को मिल रही हवा
चर्चा इस बात की है कि खेमका आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं। इस चर्चा को हवा आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के कई ट्वीट से मिल रही है। बताया जा रहा है कि अब तक राजनीति से दूर रहने वाले खेमका सियासत में अपनी नई पारी शुरुआत करने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे सकते हैं। 

दिल्ली इकाई की आप सचिव इंदु गुसाईं ने ट्वीट किया 'अरविंद केजरीवाल के कॉलेज के मित्र और आईएएस अधिकारी अशोक खेमका हरियाणा में आप की मार्गदर्शक शक्ति होंगे। वह आप में शामिल होने के लिए आईएएस छोड़ देंगे। आप परिवार का विस्तार हो रहा है।'
विज्ञापन


हालांकि खेमका ने इस बात से इनकार किया है। वे अप्रैल 2025 में रिटायर होंगे।
विज्ञापन

अरविंद केजरीवाल और अशोक खेमका - फोटो : Amar Ujala
आम आदमी पार्टी के पंजाब विधानसभा में शानदार और ऐतिहासिक जीत के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के विस्तार पर भी तेजी से काम शुरू कर दिया है। पार्टी की नजर अब पंजाब के बाद नजदीकी राज्य हरियाणा पर है। पार्टी ने अगले कुछ माह के भीतर होने वाले शहरी निकाय चुनाव लड़ने का एलान किया है। 

यह इस बात का संकेत है कि अरविंद केजरीवाल अब अपने गृह राज्य हरियाणा को लेकर काफी गंभीर हैं। कहा जा रहा है कि ऐसे में केजरीवाल इस राज्य से अपने उस मित्र को पार्टी में शामिल कराना चाहते हैं जो कॉलेज के दिनों में उनके साथी थे।

बताया जा रहा है कि हरियाणा के तेज तर्रार और अक्सर विवादों में रहने वाले आईएएस अधिकारी अशोक खेमका केजरीवाल के नए सारथी हो सकते हैं और वे पार्टी के प्रिंसिपल एडवायजर बनाए जा सकते हैं। खेमका और अरविंद केजरीवाल आईआईटी खड़गपुर में साथ पढ़ चुके हैं।

हरियाणा में 2024 में विधानसभा चुनाव होने हैं और इसी चुनाव को ध्यान में रखकर खेमका की सियासत में एंट्री होने जा रही है। अपनी ईमानदारी और भ्रष्टाचार विरोधी तेवर की वजह से ही अशोक खेमका हरियाणा में काफी लोकप्रिय हैं।  

चर्चा को मिल रही हवा
चर्चा इस बात की है कि खेमका आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं। इस चर्चा को हवा आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के कई ट्वीट से मिल रही है। बताया जा रहा है कि अब तक राजनीति से दूर रहने वाले खेमका सियासत में अपनी नई पारी शुरुआत करने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे सकते हैं। 

दिल्ली इकाई की आप सचिव इंदु गुसाईं ने ट्वीट किया 'अरविंद केजरीवाल के कॉलेज के मित्र और आईएएस अधिकारी अशोक खेमका हरियाणा में आप की मार्गदर्शक शक्ति होंगे। वह आप में शामिल होने के लिए आईएएस छोड़ देंगे। आप परिवार का विस्तार हो रहा है।'

हालांकि खेमका ने इस बात से इनकार किया है। वे अप्रैल 2025 में रिटायर होंगे।

आईएएस अशोक खेमका - फोटो : file photo
कौन हैं खेमका?
सरकारी अधिकारियों में खेमका ईमानदारी का एक पर्याय माने जाते हैं।  1991 बैच के हरियाणा कैडर के आइएएस अफसर हैं। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्मे खेमका ने आइआइटी खड़गपुर से 1988 में बीटेक किया।

इसके बाद उन्होंने कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की। वे बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में एमबीए करने के साथ-साथ वकालत की डिग्री भी ले चुके हैं। अपने तेज-तर्रार कार्यशैली की बदौलत लोगों के दिलोदिमाग में छाए रहे हैं।

गुरुग्राम में कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की जमीन सौदे से जुड़ी जांच के कारण अशोक खेमका ने अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं। वे भ्रष्टाचार को उजागर करने और अपने तबादले को लेकर हमेशा चर्चा में रहे हैं।

कहा जाता है कि वे जिस विभाग में जाते हैं, उनसे पहले उस विभाग की फाइलें समेटी जाने लगती हैं यानी वे जहां भी रहते हैं भ्रष्टाचार और घपलों को उजागर करते हैं। जिसकी वजह से वे सिस्टम के निशाने पर जाते हैं और उन्हें तबादले का ‘ईनाम’ मिलता है।  

आईएएस अशोक खेमका और रॉबर्ट वाड्रा - फोटो : file photo
सीधे सिस्टम से टकराते हैं
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरियाणा में बंसी लाल से लेकर लेकर मनोहर लाल तक की कोई ऐसी सरकार नहीं बची जिसमें खेमका सिस्टम से सीधे ना टकराए हों। 

भजन लाल, ओम प्रकाश चौटाला हों या फिर भूपेंद्र सिंह हुड्डा, हर शासन में खेमका सीधे सिस्टम से टकराते रहे। बदले में उनका धड़ाधड़ तबादला होता रहा। 

गड़बड़ियों और अनियमितताओं को उजागर करने की वजह से हरियाणा सरकार के कई मंत्रियों से भी उनका टकराव हो चुका है।

मुख्यमंत्री की बात तक नहीं मानी
2004 में जब सरकार ने कई शिक्षकों का सत्र के बीच में ही तबादला किया था तो उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला का निर्देश मानने से इनकार कर दिया था। 

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार में उन्होंने कई घोटालों का खुलासा किया था। नवंबर 2012 में तत्कालीन हुड्डा सरकार ने रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के लैंड डील से जुड़े खुलासे के बाद उनका तबादला परिवहन विभाग में कर दिया था जिस पर काफी विवाद हुआ था।

रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच 58 करोड़ रुपयों के भूमि सौदे को रद्द करने और हरियाणा के चार जिलों तथा दिल्ली में 2005 के बाद हुए वाड्रा के सभी भूमि सौदों की जांच के आदेश दिए थे। 
 

आइएएस अधिकारी अशोक खेमका - फोटो : file photo
‘भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई' के लिए खेमका को वर्ष 2011 में आइएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के साथ एसआर जिंदल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

हुड्डा सरकार में 22 बार तबादला हुआ
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार में खेमका को 22 तबादले झेलने पड़े थे। मनोहर सरकार में भी छह बार खेमका के महकमे बदले गए।

2013 में अभिलेखागार सचिव जैसे गैर महत्वपूर्ण पद पर प्रतिनियुक्त करने के अलावा हरियाणा की एक अदालत से भूलवश उनके नाम गैर जमानती वारंट भिजवा दिया गया था। इस वजह से उन्हें रहने के लिए एक छोटा कमरा दिया गया।

कायर नहीं हूं
खेमका ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'मैं कायर नहीं हूं। मैं इसी सिस्टम का हिस्सा हूं और इसी सिस्टम में रहूंगा। मुझे इस पर गर्व है। एक अधिकारी होने के नाते मैं अपने कर्तव्य का पालन कर रहा हूं। मुझे बार-बार हो रहे तबादले से कोई दिक्कत नहीं है।’
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next