करीब दो महीने के इंतजार के बाद आखिरकार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी की शीर्ष संस्था कांग्रेस कार्यसमिति का विधिवत गठन करके अपनी नई टीम बना ली है। कुल 51 सदस्यीय कार्यसमिति में होश और जोश दोनों का संतुलन साधने की कोशिश की गई है, लेकिन सोनिया के बेहद भरोसेमंद माने जाने वाले वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी और दिग्विजय सिंह और कभी राहुल गांधी के बेहद नजदीक माने जाने वाले सीपी जोशी और मोहन प्रकाश को जगह नहीं दी गई है।
हालांकि द्विवेदी लंबे समय तक संगठन महासचिव समेत पार्टी की अनेक जिम्मेदारियां संभालने के बाद अब नेतृत्व से खुद को पार्टी की दैनिक जिम्मेदारियों से मुक्ति की इच्छा जता चुके थे, लेकिन उनके जैसै वरिष्ठ नेता का कार्यसमिति में न होना चौंकाता है। जबकि दिग्विजय के कंधों पर मध्य प्रदेश में पार्टी को 15 साल बाद फिर से सत्ता में लाने की जिम्मेदारी खुद कांग्रेस अध्यक्ष ने उन्हें मध्य प्रदेश का चुनाव प्रभारी बना कर रख दी है और ऐसे में उन्हें कार्यसमिति में क्यों नहीं लिया गया समझ से परे है। जनार्दन द्विवेदी, सीपी जोशी और मोहन प्रकाश वरिष्ठ होने के साथ साथ उत्तर भारत में पार्टी के जाने माने ब्राह्मण चेहरे माने जाते हैं जबकि दिग्विजय सिंह कांग्रेस के सबसे बड़ा राजपूत चेहरा हैं।
शायद अब कांग्रेस अपनी ब्राह्मण राजनीति को आनंद शर्मा और अविनाश पांडे के जरिए साधेगी जिन्हें इन पर तरजीह देकर कार्यसमिति में लिया गया है। क्योंकि शर्मा से ज्यादा वरिष्ठ और जाना माना ब्राह्मण चेहरा शीला दीक्षित और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद को विशेष आमंत्रित सदस्यों में शामिल किया गया है मुख्य कार्यसमिति में नहीं। इसी तरह उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को कार्यसमिति के साथ साथ महासचिव बनाकर यह संकेत भी दिया गया है कि उत्तराखंड में राहुल गांधी को अपने इस क्षत्रप पर पूरा भरोसा है और पार्टी अब अपनी राजपूत राजनीति रावत के जरिए ठीक करेगी।
मुख्य कार्यसमिति में जहां सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ सोनिया की टीम के अनुभवी और वरिष्ठ सदस्यों मोतीलाल वोरा, गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, एके एंटोनी, मल्लिकार्जुन खड़गे, आनंद शर्मा और अशोक गहलौत को जगह दी गई तो वहीं नए चेहरों में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी, असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, के साथ साथ दलित चेहरे कुमारी शैलजा, मुकुल वासनिक को भी जगह दी गई है। इनके अलावा नए चेहरों में अविनाश पांडे, दीपक बाबरिया, के.सी वेणुगोपाल, ताम्रध्वज साहू, रघुवीर मीणा, गई खांगम को भी लिया गया है।
कार्यसमिति में स्थाई आमंत्रित सदस्यों में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम, पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ महाराष्ट्र के दलित नेता बाला साहब थोराट, तारिक हमीद कारा, केरल का चेहरा पी.सी. चाको, पूर्व मंत्री जितेंद्र सिंह, आरपीएन सिंह, उत्तर प्रदेश का दलित चेहरा पीएल पूनिया, पार्टी के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, आशा कुमारी, रजनी पाटिल, राम चंद्र खुंटिया, अनुग्रह नारायण सिंह, राजीव सातंव, शक्ति सिंह गोहिल, गौरव गोगोई और डा.
ए.चेलाकुमार को लिया गया है।
10 विशेष आमंत्रित सदस्यों में केएच मुनियप्पा, अरुण यादव, दीपेंद्र हुड्डा, जितिन प्रसाद, कुलदीप विश्नोई, और इंटक, युवक कांग्रेस, एनएसयूआई, महिला कांग्रेस और
कांग्रेस सेवा दल के प्रमुख पदेन शामिल हैं।