फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गोरखपुर कांड: जमानत देते हुए HC ने कहा- डॉ. कफील के खिलाफ नहीं मिले लापरवाही के सबूत

Fri, 27 Apr 2018 12:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
विज्ञापन
कफील खान
विज्ञापन

इलाहाबाद हाईकोर्ट का कहना है कि उसे डॉक्टर कफील खान के खिलाफ चिकित्सा लापरवाही के कोई सबूत नहीं मिले हैं। इसी वजह से कोर्ट ने उन्हें लगभग आठ महीनों बाद जमानत दे दी है। उन्हें गोरखपुर में हुई 60 बच्चों की मौत के बाद गिरफ्तार किया गया था। अगस्त 2017 में बच्चों की मौत कथित तौर पर ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने की वजह से हुई थी।

विज्ञापन


खान को जमानत देने के बाद अपने विस्तृत आदेश में गुरुवार को जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा- रिकॉर्ड में इस तरह का कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित होता हो कि याचिकाकर्ता अकेला इस मामले का दोषी है। यह भी एक तथ्य है कि इस मामले में कोई पूछताछ या जांच पूरी करने को नहीं बची है। कोर्ट ने डॉक्टर को जमानत देते के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामे को प्राथमिक कारण बताया। 

राज्य सरकार ने अपने हलफनामे के 16वें पैराग्राफ में कहा है कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी की वजह से नहीं हुई है। कोर्ट का कहना है कि खान को घटना के बाद से जेल में रहना पड़ा है। जबकि यह साफ नहीं है कि वह अस्पताल को मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाले टेंडर प्रक्रिया का हिस्सा थे या नहीं। याचिकाकर्ता पिछले 7 महीनों से कस्टडी में है। 
विज्ञापन


सरकारी वकील का कहना है कि अब जांच का कोई पहलू नहीं बचा है। जिससे यह साफ हो जाता है कि याचिकाकर्ता को कस्टडी में रखने की जरूरत नहीं है। कोर्ट का कहना है कि अपने हलफनामे में सरकार ने ऐसे कोई सबूत नहीं हैं जिससे यह साबित हो या संकेत मिले कि याचिकाकर्ता ने गवाहों को प्रभावित करने या फिर सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की हो।

याचिकाकर्ता मेडिकल प्रैक्टिशनर होने के साथ ही सरकारी कर्मचारी है। जिसका पिछला कोई अपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है। इसके अलावा मामले में मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाले मुखिया मनीष भंडारी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने भंडारी को जमानत दे दी क्योंकि मामले में चार्जशीट दायर की जा चुकी है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें