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SC: IMA प्रमुख को सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी, आप बुला रहे और मुसीबतें; कहा- अखबारों में अपने पैसे से छपवाएं माफी

Tue, 06 Aug 2024 07:34 PM IST
मिथिलेश नौटियाल अमर उजाला ब्यूरो

सार

शीर्ष अदालत ने आईएमए प्रमुख से सवाल पूछा, ‘क्या अशोकन का बिना शर्त माफीनामा उस अखबारों में प्रकाशित हुआ है, जिनमें उनके साक्षात्कार को प्रकाशित किया गया था?’ अदालत ने आगे कहा कि आईएमए अध्यक्ष मुश्किलों को निमंत्रण दे रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ. आरवी अशोकन से पूछा कि अदालत पर अपमानजनक टिप्पणी के लिए उन्होंने सिर्फ आईएमए के ई-अखबार और एक समाचार एजेंसी के जरिये ही माफी क्यों मांगी है? कोर्ट ने कहा, माफी उन सभी अखबारों में प्रकाशित होनी चाहिए, जिनमें उनका साक्षात्कार छपा है और यह उनके पैसे से होनी चाहिए, न कि एसोसिएशन के पैसे से। अदालत ने चेताया कि ऐसा नहीं करके आईएमए अध्यक्ष अपने लिए ही मुसीबतें बुला रहे हैं।

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'आपको अपनी जेब से भुगतान कर माफी मांगने के लिए उनसे संपर्क करना चाहिए'
जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने एक साक्षात्कार में न्यायालय के खिलाफ आईएमए  के प्रमुख अशोकन की अपमानजनक टिप्पणी के लिए मांगी गई माफी की प्रकृति पर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा, आप प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) को माफी भेजकर अपनी टिप्पणी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। जिन अखबारों में यह साक्षात्कार छपा है, आपको अपनी जेब से भुगतान कर माफी मांगने के लिए उनसे संपर्क करना चाहिए। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त तय की है। नौ जुलाई को अशोकन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि अदालत से उनकी बिना शर्त माफी विभिन्न संचार माध्यमों में प्रकाशित हुई है। इसमें एसोसिएशन का मासिक प्रकाशन और आईएमए की वेबसाइट भी शामिल है।

आरोप से मुक्त होने के लिए उचित कदम उठाएंगे: वकील
आईएमए की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पीएस पटवालिया ने कहा कि डॉ. अशोकन अदालत की अवमानना के आरोपों से खुद को मुक्त करने के लिए उचित कदम उठाएंगे। नौ जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि पतंजलि मामले की सुनवाई के संबंध में शीर्ष अदालत के खिलाफ अपनी टिप्पणी के लिए अशोकन ने मीडिया हाउस में सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। 14 मई, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापन मामले में योग गुरु बाबा रामदेव और पतंजलि के एमडी आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ चल रही अवमानना कार्यवाही में अपनी टिप्पणी के जरिये संस्था पर हमला करने के लिए अशोकन को फटकार लगाई थी।
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अशोकन ने कहा था, सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख उचित नहीं
डॉ. अशोकन ने कहा था, सुप्रीम कोर्ट का देश के चिकित्सा पेशे के खिलाफ सख्त रुख अपनाना उचित नहीं लगता। यह मामला 2022 में आईएमए की ओर से दायर एक याचिका से उत्पन्न हुआ था, जिसमें पतंजलि और योग गुरु बाबा रामदेव के कोविड टीकाकरण अभियान और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के खिलाफ बदनामी का अभियान चलाने का आरोप लगाया गया था।

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