केंद्रीय सूचना आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय और संस्कृति मंत्रालय से जवाब मांगा है। आयोग ने एक आरटीआई याचिका की सुनवाई के दौरान आदेश किया कि कोह-ए-नूर हीरे और टीपू सुल्तान की तलवार को वापस लेने को लेकर क्या कदम उठाए गए। आयोग ने जवाब देने के लिए एक माह का समय दिया है।
सूचना आयुक्त प्रोफेसर एम श्रीधर आचार्युलु ने अपने आदेश में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से ऐतिहासिक स्थलों से प्राचीन वस्तुओं की चोरी के बारे में अलर्ट, फोटो और एफआईआर करने के लिए कहा है कि ताकि तस्करों की मुश्किलें बढ़ाई जा सकें। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि एएसआई एक केंद्रीकृत सार्वजनिक दस्तावेज प्रणाली को विकसित करें, जिसमें चोरी हुई प्राचीन वस्तुओं के विवरण और फोटोग्राफ्स को सुरक्षित रखा जा सके।
बीकेएसआर अयंगार ने केन्द्रीय सूचना आयोग से अपील की थी कि जिसमें भारत सरकार से कोह-ए-नूर हीरा, सुल्तानगंज के बुद्ध, नासाक हीरा, टीपू सुल्तान की तलवार और अंगूठी, महाराजा रणजीत सिंह का स्वर्ण सिंहासन, शाहजहां के शाही मदिरा गिलास, अमरावती रेलिंग और बुद्धापेड, सरस्वती देवी की संगमरमर की प्रतिमा और टीपू सुल्तान के मैकेनिकल बाघ को भारत वापस लाने के प्रयासों को लेकर जानकारी मांगी थी।
आरटीआई के जवाब में एएसआई के जनसूचना अधिकारी ने बताया कि पुरातनता और कला अधिनियम, 1972 के तहत, एएसआई केवल उन्ही प्राचीन वस्तुओं को वापस लाने के लिए पहल कर सकता है, जिन्हें देश से अवैध रूप से देश से बाहर भेजा गया हो।
इन कलाकृतियों के बारे में आयोग का कहना है कि ये बहुमूल्य कलाकृतियों भारत की गौरवशाली संस्कृति को दर्शाती हैं और इतना शानदार इतिहास लुटेरों, अपराधियों या विदेशी सरकारों या निजी संग्रहालयों के हाथों में नहीं हो सकता है। इन विरासतों के साथ लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं क्योंकि उनमें से कुछ को धार्मिक रूप से पवित्र माना जाता है
आयोग ने इस पर भी आपत्ति जताई कि प्रधानमंत्री कार्यालय और संस्कृति मंत्रालय ने आरटीआई को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पास भेज दिया। आयोग का कहना है कि एएसआई के पास ऐसी कलाकृतियों को वापस लाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। आयोग ने कार्यालय और संस्कृति मंत्रालय को आरटीआई का जल्द से जल्द जवाब देने का निर्देश दिया है।