राममंदिर निर्माण से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़ी कई अन्य हस्तियां भी अनंत में विलीन हो गई हैं। मसलन तब विवादित परिसर का ताला खुलवाने और मंदिर का शिलान्यास करने वाले तत्कालीन पीएम राजीव गांधी और गृह मंत्री बूटा सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं।
इसके बाद जिन पीवी नरसिंह राव के प्रधानमंत्री रहते साल 1992 में विवादित ढांचा टूटा उनकी भी बस यादें बाकी हैं। मंदिर आंदोलन को शुरुआती दौर में अपने समर्थन से नई दिशा देने वाले महंत रामचंद्रदास महंत, देवराहा बाबा, महंत अवैद्यनाथ, संघ प्रमुख रहे केसी सुदर्शन, विहिप के वरिष्ठ नेता विष्णुहरि डालमिया, अशोक सिंहल जैसी बड़ी हस्तियां भी अब इस दुनिया में नहीं हैं।