यहां पर इमरान खान कुछ ढिलाई बरत रहे थे। कई वर्षों से पाकिस्तान में चीन के बड़े प्रोजेक्ट पर स्थानीय हस्तक्षेप बढ़ रहा था। भ्रष्टाचार के मामले खुलने लगे। सेना के पास मौजूद 50 से ज्यादा बड़े कारोबार कमजोर पड़ रहे थे। गत वर्षों में पाक सेना का बिजनेस करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये आंका गया था। सेना के दो दर्जन अफसर जो अब रिटायर हो गए हैं, उनके स्विस बैंक में खाते हैं। इनमें अघोषित तौर पर लगभग 89 हजार करोड़ रुपये (भारतीय रुपये के हिसाब से) जमा थे। पाकिस्तानी सेना के बिजनेस ग्रुप में फौजी फाउंडेशन भी है। इसमें बिजली, हैवी व्हीकल, निर्माण कार्य, मॉल्स और दूसरे कारोबार शामिल हैं। यहां पर इमरान खान का हस्तक्षेप बढ़ने लगा था। अनेक प्रोजेक्ट में चीन का पैसा लगा था। इससे चीनी कंपनियां पीछे हटने लगी। यहीं से सेना पर दबाव बढ़ता चला गया।
पाक सेना मार्शल लॉ नहीं लगाना चाहती
विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक अस्थिरता के दौर में पाक सेना मार्शल लॉ लगाने का जोखिम नहीं उठाएगी। इससे दुनिया में सेना की बदनामी हो सकती है। इस बार सेना, सामने नहीं आएगी। इमरान खान बहुमत नहीं जुटा पाते, तो असेंबली भंग कर दी जाएगी। जनरल बाजवा, भारत से अच्छे संबंध चाहते हैं। वह अर्थ जगत पर सोच रहे हैं। नई रणनीति में उन्हें अतीत की कई बातें पीछे छोड़नी पड़ेंगी। शहबाज शरीफ, नेता प्रतिपक्ष पाकिस्तान ने कहा, संसद में पीएम भरोसा खो बैठे हैं, वे इस्तीफा देकर एक नई परंपरा स्थापित करें।
मौलाना फजलुर रहमान, अध्यक्ष, पीडीएम, का कहना था, अब सब कुछ हाथ से निकल चुका है। पानी, पुल के नीचे से भी गुजर चुका है। तेरे लिए एक बूंद भी नहीं बचा है। इमरान खान, इस साल बाजवा को दूसरा सेवा विस्तार देने के पक्ष में नहीं हैं। बाजवा ने खान के विश्वस्त पूर्व आईएसआई चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद, जिसे वे सेना प्रमुख बनाना चाहते थे, उन्हें अब मुख्य लाइन से दूर कर दिया गया है। जानकारों का कहना है कि जनरल बाजवा के इशारे पर इमरान खान के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। इमरान खान, चाहते हुए भी चीन का नाम नहीं ले सके। वजह, पाकिस्तान में भारी पैमाने पर चीनी प्रोजेक्ट पर काम शुरू होना है।