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जब उपराष्ट्रपति भी हो गए भ्रामक विज्ञापन का शिकार, संसद में सुनाया किस्सा

Fri, 29 Dec 2017 07:21 PM IST
संजय मिश्र/नई दिल्ली
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आम लोगों को ही अक्सर भ्रामक विज्ञापनों को शिकार होते देखा गया है। मगर देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी भ्रामक विज्ञापन के शिकार लोगों की श्रेणी में शुमार हो गए हैं। नायडू ने अपनी गाथा खुद राज्यसभा में सांसदों को बताई।
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इस मामले में उन्होंने केंद्रीय उपभोक्ता एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान को तत्काल कदम उठाने को कहा है। दरअसल सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने शुक्रवार को भ्रामक विज्ञापनों का मुद्दा उठाते हुए मंत्री से मामले में सफाई मांगी तो वेंकैया ने मंत्री के बोलने से पूर्व अपना एक वाक्या सुनाया। वजन कम करने वाले एक भ्रामक विज्ञापन के खेल से परदा हटाते हुए नायडू ने कहा कि वैसे तो उनका वजन कम हो गया है।

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मगर एक दिन उन्होंने विज्ञापन देखा, जिसमें 28 दिन में वजन कम होने का दावा किया गया था। कैपसूल खाने से वजन कम करने का विज्ञापन था। उन्होंने उक्त विज्ञापन की साईट पर जाकर उसके खरीद की प्रक्रिया शुरू की। तो पहले था कि 150 रूपया देकर कैपसूल प्राप्त की जा सकती है। जब उन्होंने 150 रुपए का पेमेंट कर दिया तो संदेश आया कि 1000 रुपए जमा करने पर ज्यादा प्रभावी दवा मिलेगी।
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नायडू ने बताया कि विज्ञापन की तह तक जाने के लिए उन्होंने अपने स्टाफ से 1000 रुपए जमा करवाया, मगर दवा नहीं आई। बतौर नायडू उन्होंने इस भ्रामक विज्ञापन की शिकायत पत्र के जरिए उपभोक्ता एवं संरक्षण मंत्रालय को भेजी। मंत्रालय की ओर से जवाब आया कि यह कंपनी भारत से नहीं बल्कि अमेरिका से संचालित होती है, इसलिए इसपर हाथ बंधे हैं। अपना वृतांत सुनाने के बाद नायडू ने विभाग के मंत्री रामविलास पासवान से कहा कि वे इस मामले में कड़ा कदम उठाएं। ताकि आम उपभोक्ता के हित को संरक्षित किया जा सके। 
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उपभोक्ता संरक्षण विधेयक पर इसी सत्र में संसद की मुहर लगवाएगी सरकार- पासवान 

भ्रामक विज्ञापन और कालाबाजारी पर नकेल कसने के लिए सरकार की मंशा बताते हुए केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि तमाम अध्ययन और चर्चाओं के बाद सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण कानून 2017 का प्रस्ताव किया है।

केंद्रीय कैबिनेट ने नए उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2017 को एक सप्ताह पहले ही मंजूरी दी है। संसद के इस शीत सत्र में ही इस बिल को लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों में पारित होने के लिए पेश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने वर्ष 2015 में ही इस बिल को लोकसभा में पेश किया था।

मगर राज्यसभा ने बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया। पासवान ने कहा कि उन्होंने सेलेक्ट कमेटी से आए सभी सुझावों को नए बिल में स्थान देते हुए उसे बेहद प्रभावी बनाया है। उन्होंने कहा कि संसद के इस शीत सत्र में ही इस बिल को दोनों सदनों से पारित करवाया जाएगा। 
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नरेश अग्रवाल ने योग गुरू राम देव पर साधा अपरोक्ष निशाना 

- फोटो : ANI
सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने भ्रामक विज्ञापनों का मामला राज्यसभा में उठाते हुए योग गुरु रामदेव पर अपरोक्ष रूप से निशाना साधा। रामदेव का नाम लिए बिना अग्रवाल ने कहा कि आजकल नकली और असली का भेद पता करना बड़ा मुश्किल है।

हर चीज में मिलावट हो रही है और हर कोई अपने उत्पाद को असली करार देते हुए दूसरे को नकली बता रहा है। उन्होंने आगे कहा कि एक बाबा हैं जोकि रोजाना टीवी चैनलों के विज्ञापन में अपने प्रोडक्ट का असली होने का दावा करते हैं। इन बाबा की कोई अपनी फैक्ट्री या उद्योग नही हैं। मगर बाबा ने सारे उत्पाद बाजार में उतार दिए हैं।

इसपर सांसदों की ओर से थोड़ी टोका-टाकी हुई। तो अग्रवाल ने कहा कि वे किसी का नाम नहीं ले रहे हैं। महज बाबा कह रहे हैं। अग्रवाल ने कहा कि जनता ऐसे भ्रामक विज्ञापनों का शिकार होती है। अग्रवाल यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि वो तंदरूस्त बनाने वाली उत्पाद का प्रचार करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तमाम विज्ञापन आते हैं जिनका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं।   सपा सांसद ने कहा कि पहले कोई आदमी मोटा-ताजा होता था तो उसे खाते-पीते घर का करार दिया जाता था। मगर अब उल्टा हो गया है। अब तो आप पतले हैं तो आपकों संपन्न परिवार का माना जाता है। लोग कहते हैं कि पैसा है इसलिए मेंटेन रखा है। वरना मोटे लोगों के बारे में तो धारणा यूं ही मिडिल क्लास की बन जाती है।   सांसद अग्रवाल ने कहा कि यूरोप में नकली वस्तुओं का नाम तक नहीं सुना जाता है। मगर भारत में कोई ऐसी चीज नहीं जिसमें मिलावट न हो। दावे के साथ हम यह नहीं कह सकते हैं कि उपयोग की जाने वाली वस्तुएं असली हैं। उन्होंने कहा कि सब्जी से लेकर तमाम खाद्य पदार्थों में मिलावट का खेल जारी है।   मिलावटी उत्पाद खाने से देश में कैंसर रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसपर नकेल कसने के लिए उन्होंने सरकार से तत्काल कड़ा कदम उठाने की मांग की। अग्रवाल के संबोधन के बाद खुद नायडू ने भ्रामक विज्ञापन पर अपनी आपबीती सुनाई। उसके मंत्री ने सरकार के प्रयासों से सदन को अवगत कराया। 
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