सुप्रीम कोर्ट के जिस मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री को उनके भाषण के सिलसिले में कटघरे में खड़ा किया, उन्होंने कभी अपने पिता को भी नहीं बख्शा था।
न्यायाधीश ठाकुर ने एक बार अपने पिता की सरकार की बर्खास्तगी की भी मांग कर दी थी। यह गुलाम मोहम्मद शाह की सरकार थी, जिसमें टीएस ठाकुर के पिता देवीदास ठाकुर उपमुख्यमंत्री थे। गुलाम मुहम्मद शाह 2 जुलाई 1984 से 6 मार्च 1986 तक जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री थे।
उस दौरान तीरथ सिंह ठाकुर जम्मू हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हुआ करते थे। बार एसोसिएशन में उनके पुराने साथी बताते हैं कि गुलाम मोहम्मद शाह की सरकार विवादों में थी और चारों तरफ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे थे।
जस्टिस ठाकुर लंबे समय से जानने वाले और वरिष्ठ वकील बीएस सलाथिया कहते हैं, "तीरथ सिंह ठाकुर हमेशा से सही को सही और गलत को गलत कहने का माद्दा रखते थे"। उन्होंने कहा, "जब वे अपने पिता के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं तो आप समझ जाइए कि वो गलत होते हुए नहीं देख सकते हैं। और वो जिस पद पर आज हैं वहां वो भला कैसे चुप रह सकते हैं जब पूरे देश में जजों की इतनी कमी है।
अब जम्मू कश्मीर उच्च न्यायलय को देख लीजिए। यहाँ 70 स्वीकृत पद हैं मगर जजों की मौजूदा संख्या सिर्फ आठ है। तो वो भला कैसे नहीं बोलें?" हाल ही में न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर ने सबको अचम्भे में तब डाल दिया जब वो एक समारोह में मंच से बोलते-बोलते रो पड़े थे। मौका था राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य न्यायाधीशों के सम्मलेन का जिसमें प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद थे।
न्यायमूर्ति ठाकुर यह कहते-कहते आंसुओं में डूब गए कि आम आदमी का न्याय प्रणाली पर विश्वास निम्नतर स्तर पर पहुंच चुका है। यह घटना इस साल अप्रैल माह की थी।
तीन महीनों के बाद यानी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने फिर एक समारोह में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद की मौजूदगी में प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा "आप गरीबी हटाएं, रोजगार का सृजन करें, योजनाएं लाएं मगर देश के लोगों के लिए न्याय के बारे में भी सोचें।"