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Wheat Price Rise: आम आदमी को महंगाई से नहीं मिलेगी राहत, सरकार के इस कदम से नहीं कम होंगे आटे के दाम!

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 12 Dec 2024 05:27 PM IST

सार

Wheat Price: खाद्य मंत्रालय ने गेहूं की लिमिट में कटौती की घोषणा करते हुए कहा, खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने, जमाखोरी और अटकलों से कीमतों पर असर को खत्म करने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाई है।
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गेहूं की कीमतें - फोटो : अमर उजाला


गेहूं के कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि, केंद्र सरकार ने इससे पहले भी गेहूं की स्टॉक लिमिट का नियम लगाया गया था। हालांकि जिस तेजी से गेहूं के भाव में गिरावट आनी चाहिए, वैसा कुछ देखने में नहीं आ रहा है। इन दिनों देश में गेहूं की भारी कमी है। लेकिन सरकार पिछले दो साल से इस तरह के पैटर्न को अपना रही है। लेकिन बाजार में इतना गेहूं है कि नहीं कि सप्लाई बढ़े। सरकार दावा कर रही है कि देश में पर्याप्त गेहूं का स्टॉक है। यह सही नहीं है। इस वर्ष करीब करीब 8 से 10 मिलियन टन की गेहूं की कमी है। इसकी वजह से ही रेट बढ़ रहे है। हालांकि सरकार के इस फैसले से रेट में अगले एक दो हफ्ते कोई फर्क नहीं पड़ेगा। पिछले छह माह से जो दाम चढ़ रहे थे। उनमें अब थोड़ी स्थिरता आएगी। रेट बढ़ने से रुक जाएंगे।


खाद्य मंत्रालय ने गेहूं की लिमिट में कटौती की घोषणा करते हुए कहा, खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने, जमाखोरी और अटकलों से कीमतों पर असर को खत्म करने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाई है। जो कि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कारोबारी, थोक कारोबारी, रिटेलर, बिग चेन रिटेलर खाद्य उत्पादों को प्रोसेस करने वालों पर लागू है। सरकार गेहूं के दाम में कमी लाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। इसी कोशिश के तहत भारत सरकार ने गेहूं की स्टॉक लिमिट में बदलाव करने का फैसला लिया है जो कि 31 मार्च 2025 तक लागू रहेगा।


खाद्य मंत्रालय ने कहा कि, देश में खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने और जमाखोरी रोकने के लिए भारत सरकार ने थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़ी और छोटी रिटेल चेन और प्रोसेसर्स पर गेहूं की स्टॉक लिमिट लगाई है। नए नियमों के मुताबिक, होलसेलर्स अब 2,000 टन की जगह 1,000 टन गेहूं रख सकेंगे।इसी तरह रिटेलर्स 10 टन के बदले 5 टन गेहूं रख सकेंगे जबकि बड़ी चेन के रिटेलर्स 10 टन की जगह अब 5 टन गेहूं ही रख सकेंगे।  प्रोसेसर्स अब अपनी क्षमता के 50 परसेंट गेहूं रखेंगे जबकि पहले यह स्टॉक लिमिट 60 परसेंट थी। सरकार का मानना है कि, इस निर्णय के बाद सिस्टम में गेहूं की सप्लाई बढ़ेगी और इससे कीमतों के नियंत्रण में बने रहने की उम्मीद है। फिलहाल गेहूं की बुवाई चल रही है और नई फसल मार्च में आने लगती हैं। इसलिए सरकार ने ये लिमिट भी मार्च तक के लिए है। हालांकि दूसरी तरफ सरकार ने यह भी कहा कि देश में गेहूं की कोई कमी नहीं हैं।


ये नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

केंद्र सरकार ने सबसे पहले 24 जून को स्टॉक लिमिट का नियम लगाया था। इसके बाद 9 सितंबर को इसमें बदलाव किया गया। केंद्र सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि जमाखोरी पर ब्रेक लगे और गेहूं के बढ़ते दाम को काबू में रखा जा सके। खाद्य मंत्रालय ने अपने निर्देश में कहा कि स्टॉक करने वाली सभी कंपनियों को स्टॉक लिमिट पोर्टल (https://evegoils.nic.in/wsp/login) पर जानकारी देनी होगी। हर शुक्रवार को स्टॉक के बारे में बताना भी होगा।


ऐसे में अगर कोई कंपनी (होलसेलर, बिग चेन रिटेलर्स, स्मॉल चेन रिटेलर्स, प्रोसेसर्स) बताई गई लिमिट से अधिक गेहूं जमा करती है तो उसे नोटिफिकेशन जारी होने के 15 दिन के अंदर नई स्टॉक लिमिट को मेंटेन करना होगा। अगर कोई कंपनी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं करती है या स्टॉक लिमिट नियमों का उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। खाद्य मंत्रालय गेहूं और आटा के महंगे भाव को देखते हुए स्टॉक लिमिट पर बराबर नजर रख रहा है।  मंत्रालय की कोशिश है कि कालाबाजारी पर अंकुश लगाकर गेहूं के भाव को कम या स्थिर रखा जाए। इसी कोशिश में गेहूं की स्टॉक लिमिट लगाई गई है।

 
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