असद और गुलाम का एनकाउंटर
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माफिया अतीक अहमद के बेटे असद और शूटर गुलाम की झांसी में हुई मुठभेड़ की जांच दो सदस्यीय न्यायिक आयोग के हवाले कर दी गई है। सरकार ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस राजीव लोचन मेहरोत्रा को आयोग का अध्यक्ष, जबकि पूर्व डीजी विजय कुमार गुप्ता को सदस्य बनाया है। आयोग 26 अप्रैल को झांसी जाकर मामले की जांच शुरू कर सकता है।
असद और गुलाम दोनों ही उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी थे। 13 अप्रैल को पुलिस ने दोनों का झांसी में एनकाउंटर कर दिया। अब सरकार को इस एनकाउंटर की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया है। आइए जानते हैं कि ये जांच कैसे होगी? न्यायिक आयोग किन सवालों का जवाब तलाशेगी?
असद और गुलाम का एनकाउंटर
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एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट क्या कहता है?
23 सितंबर 2014 को तत्कालीन चीफ जस्टिस आरएम लोढा और आरएफ नरीमन की पीठ ने एनकाउंटर को लेकर 16 बिंदुओं में विस्तृत गाइडलाइंस जारी की थी। कोर्ट ने एक फैसले में कहा था, 'पुलिस की कार्रवाई में इस तरह से होने वाली मौत के सभी मामलों में मजिस्ट्रेट जांच जरूरी है। आपराधिक कार्रवाई का आरोप लगाते हुए पुलिस के खिलाफ शिकायत किए जाने पर हर मामले में आईपीसी की संबंधित धाराओं में एक एफआईआर अवश्य दर्ज की जानी चाहिए। यह गैर-इरादतन हत्या का मामला बनता है।'
कोर्ट ने कहा था कि CRPC 1973 की धारा 176 के तहत की गई जांच में यह पता चलना चाहिए कि क्या इस तरह का एक्शन जायज था या नहीं? जांच के बाद धारा 190 के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट को एक रिपोर्ट भेजी जानी चाहिए।
गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि जब भी पुलिस को किसी अपराधी की मूवमेंट या गतिविधि के बारे में इनपुट मिलता है तो उसे केस डायरी या इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में कुछ लिखित रूप से दर्ज करना जरूरी है। इसके बाद अगर कोई एनकाउंटर होता है और पुलिस टीम द्वारा हथियार के इस्तेमाल से मौत होती है तो बिना देर किए सेक्शन 157 के तहत एफआईआर दर्ज कर कोर्ट में पेश किया जाना चाहिए।
एनकाउंटर में एक स्वतंत्र जांच के लिए प्रावधान है जिसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (एनकाउंटर वाली पुलिस टीम के हेड से ऊपर के) की निगरानी में सीआईडी या दूसरे थाने की पुलिस टीम द्वारा की जानी चाहिए। संविधान के आर्टिकल 141 के तहत कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी पुलिस एनकाउंटर में हुई मौतों और गंभीर चोट के मामलों में इसका पालन किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर स्वतंत्र जांच को लेकर गंभीर रूप से संदेह पैदा न हो तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को रिपोर्ट देना जरूरी नहीं है। हालांकि घटना के बारे में जानकारी एनएचआरसी या राज्य मानवाधिकार आयोग को भेजी जानी चाहिए।
मानवाधिकार आयोग क्या कहता है?
मार्च 1997 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के तत्कालीन अध्यक्ष पूर्व सीजेआई एमएन वेंकटचेलैया ने सभी मुख्यमंत्रियों को एनकाउंटर को लेकर एक चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने लिखा था कि एनएचआरसी को शिकायतें मिल रही है कि फेक एनकाउंटर बढ़ रहे हैं। एनजीओ और आम लोगों की शिकायत है कि पुलिस तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बगैर आरोपियों को मार देती है।
चिट्ठी में कहा गया था, 'हमारे कानून के तहत पुलिस के पास किसी दूसरे व्यक्ति की जान लेने का कोई अधिकार नहीं है। अगर इसके जरिए पुलिसकर्मी किसी व्यक्ति की हत्या करता है तो यह हत्या का मामला है। हालांकि कानूनी तौर पर साबित होना चाहिए कि ये हत्या गुनाह था या नहीं।'
अब जानिए न्यायिक आयोग की जांच में क्या-क्या होगा?
इसे समझने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता चंद्र प्रकाश पांडेय से बात की। उन्होंने कहा, 'असद और गुलाम एनकाउंटर के मामले में दो सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन हुआ है। इसमें एक अध्यक्ष तो दूसरे सदस्य हैं।’
‘दोनों जांच शुरू करने से पहले पुलिस के उस बयान का अध्ययन करेंगे जो असद और गुलाम के एनकाउंटर के बाद मीडिया में दिया गया था। इसके बाद उसी बयान के आधार पर आयोग घटनास्थल का मुआयना करेगा। घटनास्थल पर जाकर पूरी घटना को समझने की कोशिश की जाएगी।’
‘इसके बाद जांच आयोग के मन में जो सवाल उठेगा उन सवालों का जवाब तलाशने के लिए वह एनकाउंटर वाली टीम और उस प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों से पूछताछ करेगी। आयोग एनकाउंटर में मारे जाने वाले दोनों आरोपियों के परिजनों से भी बातचीत करेगी। उनके द्वारा उठाए गए सवालों को भी जानेगी।'
असद, अतीक और गुलाम
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क्यों उठ रहे असद और गुलाम के एनकाउंटर पर सवाल?
असद और गुलाम को यूपी STF ने 13 अप्रैल को झांसी में हुई एक मुठभेड़ में मार गिराया। दोनों पर 5-5 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस ने दावा किया कि उसने असद और गुलाम को जिंदा पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन दोनों ने फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।
एनकाउंटर को लेकर पुलिस FIR में कहा गया है कि असद और गुलाम बिना लाइसेंस नंबर प्लेट वाली लाल और काले रंग की डिस्कवर मोटरसाइकिल से भाग रहे थे। वे चिरगांव से आगे पारीछा की तरफ जा रहे थे, जब पुलिस ने उन्हें देखा और रुकने को कहा तो दोनों ने अंधाधुंध फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस टीम ने जवाबी फायरिंग की जिसमें दोनों को मार गिराया गया।
सवाल-1 : पुलिस का कहना है कि दोनों बाइक से थे और फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में दोनों की बाइक गिर गई और गोली लगने से दोनों की मौत हो गई। अब सवाल ये है कि अगर दोनों भाग रहे थे तो बाइक की रफ्तार काफी तेज रही होगी। ऐसे में बाइक गिरी लेकिन एक भी खरोंच तक बाइक में नहीं आई। ऐसा कैसे हुआ?
सवाल-2: बाइक की चाबी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुठभेड़ स्थल से जो तस्वीरें सामने आईं, उसमें बाइक की चाबी भी गायब थी। असद के एनकाउंटर के बाद स्थानीय पुलिस के पहुंचने से पहले मीडियाकर्मी तस्वीरें लेने मौके पर पहुंच गए थे। तस्वीरों में बाइक की चाबी गायब है। पुलिस का कहना है कि हो सकता है बाइक पुरानी होने के कारण चाबी कहीं गिर गई हो। बाइक की खोई हुई चाबी पर एक रहस्य छाया हुआ है।
सवाल-3 : STF टीम ने एनकाउंटर के बाद असद और गुलाम के पास से जो बाइक बरामद की है, उस पर नंबर प्लेट नहीं मिली है, ऐसे में हो सकता है कि बाइक चोरी की गई है। हर गाड़ी पर एक इंजन नंबर भी होता है, लेकिन इस पर वह भी नहीं है। आखिर ऐसा कैसे हो सकता है?
असद अहमद एनकाउंटर में ढेर
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सवाल-4: पुलिस ने बताया कि असद और गुलाम पारीछा बांध के पास छिपे थे। यह जगह हाईवे से लगभग दो किलोमीटर दूर है। यहां पहुंचने का रास्ता इतना खराब है कि कोई भी गाड़ी 10 या 20 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से ज्यादा तेज नहीं चल सकती। ऐसे में सवाल उठता है कि जब एसटीएफ उनका पीछा कर रही थी, ऐसे में वह इतनी दूर तक कैसे पहुंच सके?
सवाल-5: सवाल एनकाउंटर की जगह पर भी उठ रहा है। जिस जगह एनकाउंटर हुआ वहां तक पहुंचने का रास्ता बहुत ही पथरीला और ऊबड़-खाबड़ है। पुलिस की मानें तो इसके पहले असद कानपुर, दिल्ली, अजमेर, मुंबई जैसी जगहों पर छिपा था, ऐसे में वह यहां तक कैसे और क्यों आया ये भी सवाल बना हुआ है?
इन सवालों का भी जवाब तलाशेगा न्यायिक आयोग
1. असद और गुलाम के झांसी में होने की सूचना कब और कैसे मिली?
2. दोनों को लेकर क्या सूचना मिली थी? सूचना मिलने के बाद टीम ने सबसे पहले क्या किया?
3. क्या स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी गई थी?
4. अगर दोनों अतीक और अशरफ को छुड़ाने के लिए आए थे, तो उन्होंने हमला क्यों नहीं किया?
5. इस घटना से जुड़े कितने सबूत पुलिस के पास है?
6. असद और गुलाम झांसी में कहां रुके थे? किसने मदद की? बाइक कहां से आई थी?
7. बाइक की चाबी कहां है? बाइक किसके नाम है?