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भारत-ईयू समझौते पर सियासी जंग: जयराम रमेश के बयान पर पीयूष गोयल का पलटवार, बोले- ये तो खट्टे अंगूर वाली कहानी

Thu, 29 Jan 2026 04:10 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और कांग्रेस नेता जयराम रमेश आमने-सामने हैं। गोयल ने रमेश के आरोपों को खट्टे अंगूर बताते हुए कहा कि यह डील भारत के लिए बड़ा अवसर है। आइए जानते हैं इस समझौते पर गोयल ने जयराम को क्या कुछ कहा।
 
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पीयूष गोयल, केंद्रीय मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के बयान पर तीखा जवाब देते हुए कहा है कि यह खट्टे अंगूर वाली राजनीति है। गोयल ने आरोप लगाया कि जिन लोगों का जमीनी हकीकत से कोई जुड़ाव नहीं रहा, वे अब फैसले न लेने को ही उपलब्धि बताने की कोशिश कर रहे हैं। 

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पीयूष गोयल ने साफ कहा कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को बेहद बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया सौदा कहना गलत है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दुनिया इसे मदर ऑफ ऑल डील्स कह रही है, तब कांग्रेस इसे क्यों कमतर आंक रही है। गोयल के मुताबिक यह समझौता 25 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त जीडीपी, 11 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक व्यापार और करीब दो अरब लोगों के साझा बाजार से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत के 33 अरब डॉलर के श्रम-आधारित निर्यात को लेकर डर फैलाना भ्रामक है।

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पिछली सरकारों की निष्क्रियता के कारण भारत ने बहुत कुछ खोया

  • देश को रोजगार, आय और विकास के बड़े अवसर गंवाने पड़े।
  • उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता ने इस निष्क्रियता को बार-बार चुनावों में खारिज किया है।
  • गोयल के मुताबिक भारत और यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता कोई जीरो-सम गेम नहीं है।
  • गोयल ने इसे भारत और ईयू दोनों के लिए विन-विन डील बताया।


सीबीएम और निर्यातकों का मुद्दा
कांग्रेस द्वारा उठाए गए सीबीएम (कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म) के सवाल पर गोयल ने कहा कि मौजूदा सरकार ने इस मुद्दे को सबसे गंभीरता से उठाया है। उन्होंने कहा कि स्टील, एल्युमिनियम समेत सभी क्षेत्रों के निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए रचनात्मक और व्यावहारिक रास्ते निकाले गए हैं। गोयल के अनुसार, सरकार ने संवाद, भरोसे और साझेदारी के जरिए समाधान खोजे हैं, न कि माय वे या हाइवे जैसी जिद के साथ।

स्वास्थ्य, आईपीआर और सेवाओं पर सरकार का पक्ष
गोयल ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े नियमों पर कोई समझौता नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़ी शर्तें डब्ल्यू के ट्रिप्स समझौते जैसी ही हैं, जिनमें सार्वजनिक स्वास्थ्य, तकनीक हस्तांतरण और भारत की पारंपरिक डिजिटल ज्ञान लाइब्रेरी की सुरक्षा शामिल है। सेवाओं के क्षेत्र में भी भारत की घरेलू नीतियों के अनुरूप ही प्रतिबद्धताएं की गई हैं, जिससे निवेश और तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।

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ऑटो सेक्टर और मेक इन इंडिया
ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर कांग्रेस की चिंता पर गोयल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि कोटा आधारित और चरणबद्ध नीति से विदेशी कंपनियों को भारत में असेंबली और फिर पूर्ण उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे उच्च तकनीक, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और बेहतर गुणवत्ता मानक भारत में आएंगे, साथ ही उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प मिलेंगे।

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जय राम रमेश ने क्या कहा था?
जयराम रमेश ने कहा था कि यह समझौता भारत की ओर से अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक खुलापन है और इससे ईयू से आयात बढ़ सकता है। उन्होंने सीबीएम, सख्त स्वास्थ्य मानकों, फार्मा सेक्टर के आईपीआर, ऑटो सेक्टर और रूस से आने वाले रिफाइंड फ्यूल को लेकर भी चिंता जताई थी। रमेश के मुताबिक, इन मुद्दों पर स्पष्टता के बिना एफटीए से मिलने वाले फायदे कमजोर पड़ सकते हैं।

पीयूष गोयल ने कहा कि निराशावादी नजरिये से बाहर निकलने की जरूरत है। उन्होंने अपील की कि भारत के महत्वाकांक्षी युवाओं और कारोबारियों के लिए रास्ते खोले जाएं, न कि रोड़े अटकाए जाएं। सरकार के मुताबिक यह एफटीए भारत की आर्थिक वृद्धि, रोजगार और वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी बढ़ाने का बड़ा अवसर है।

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