भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के बयान पर तीखा जवाब देते हुए कहा है कि यह खट्टे अंगूर वाली राजनीति है। गोयल ने आरोप लगाया कि जिन लोगों का जमीनी हकीकत से कोई जुड़ाव नहीं रहा, वे अब फैसले न लेने को ही उपलब्धि बताने की कोशिश कर रहे हैं।
सीबीएम और निर्यातकों का मुद्दा
कांग्रेस द्वारा उठाए गए सीबीएम (कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म) के सवाल पर गोयल ने कहा कि मौजूदा सरकार ने इस मुद्दे को सबसे गंभीरता से उठाया है। उन्होंने कहा कि स्टील, एल्युमिनियम समेत सभी क्षेत्रों के निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए रचनात्मक और व्यावहारिक रास्ते निकाले गए हैं। गोयल के अनुसार, सरकार ने संवाद, भरोसे और साझेदारी के जरिए समाधान खोजे हैं, न कि माय वे या हाइवे जैसी जिद के साथ।
स्वास्थ्य, आईपीआर और सेवाओं पर सरकार का पक्ष
गोयल ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े नियमों पर कोई समझौता नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़ी शर्तें डब्ल्यू के ट्रिप्स समझौते जैसी ही हैं, जिनमें सार्वजनिक स्वास्थ्य, तकनीक हस्तांतरण और भारत की पारंपरिक डिजिटल ज्ञान लाइब्रेरी की सुरक्षा शामिल है। सेवाओं के क्षेत्र में भी भारत की घरेलू नीतियों के अनुरूप ही प्रतिबद्धताएं की गई हैं, जिससे निवेश और तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।
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ऑटो सेक्टर और मेक इन इंडिया
ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर कांग्रेस की चिंता पर गोयल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि कोटा आधारित और चरणबद्ध नीति से विदेशी कंपनियों को भारत में असेंबली और फिर पूर्ण उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे उच्च तकनीक, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और बेहतर गुणवत्ता मानक भारत में आएंगे, साथ ही उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प मिलेंगे।