पूर्व आईपीएस एवं सीआईसी रहे यशोवर्धन आजाद के अनुसार, सरकार सेवा विस्तार किस लिए देती है। क्या उस नौकरशाह के जैसा कोई दूसरा अफसर देश में नहीं है। देश में ऐसी क्या स्थिति बनी है कि जिसमें सरकार के पास इस तरह की अहम पोस्टिंग करने के लिए समय ही नहीं है। कोई गंभीर खतरा है, लड़ाई चल रही है या कोई दूसरी विषम परिस्थिति है। ऐसा तो कुछ नहीं है। जब ऐसी कोई स्थिति नहीं है तो एक्सटेंशन देने का औचित्य भी नहीं बनता।
बतौर यशोवर्धन आजाद, जब किसी एक नौकरशाह को सेवा विस्तार मिलता है तो उसकी वजह से किसी के हित तो प्रभावित होंगे ही, यह लाजिमी है। क्या राजनीतिक स्वार्थों के चलते एक्सटेंशन मिल रहा है। नौकरशाह का अपना कोई हित है। ऐसा कोई तो कारण अवश्य है। प्रजातंत्र में लोगों को यह जानने का अधिकार है कि किसी व्यक्ति को एक्सटेंशन मिला है तो उसके पीछे क्या कारण हैं। उस व्यक्ति में कोई खास प्रतिभा है। वह राज लोगों के सामने आना चाहिए। सरकार छिपाती क्यों है। देश के लोगों को संबंधित नौकरशाह की प्रतिभा जानने का हक है। खासतौर से उस देश में, जिसे सूचना प्रणाली के मामले में एक गढ़ माना गया है। 2005 में बने आरटीआई एक्ट को विश्व का सशक्त कानून कहा जाता है। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता होनी चाहिए। लोगों को एक्सटेंशन का राज पता होना चाहिए। नौकरशाहों को लोगों के टैक्स से वेतन मिलता है, इसलिए उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि किस अधिकारी को सरकार क्यों सेवा विस्तार दे रही है। यह जानना. इसमें तो कुछ गलत भी नहीं है।
केंद्र सरकार में कार्यरत एक अधिकारी बताते हैं, सेवा विस्तार देने के पीछे का कारण आसानी से समझा जा सकता है। जो अधिकारी, सरकार के मकसद को पूरा करने में अपनी ताकत लगाता है, उसे सेवा विस्तार मिल जाता है। यहां पर 'मकसद' शब्द के कई अर्थ निकाले जा सकते हैं। जैसे केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला, जिन्हें एक साल का सेवा विस्तार मिला है, उनके समय में केंद्र सरकार ने अपने कई एजेंडे पूरे किए हैं। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाई, एनपीआर और सीएए जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाने का प्रयास हुआ। राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई अहम मसलों को निपटाया गया। पश्चिम बंगाल में सीबीआई टीम को बंदी बना लेना, वहां के मुख्य सचिव का विवाद और दूसरे कई ऐसे मसले रहे हैं कि जिनमें भल्ला की भूमिका रही है।
हालांकि ये सभी वे कार्य हैं जो एक गृह सचिव की ड्यूटी के दायरे में आते हैं। पिछले सात-आठ वर्षों में किसी भी गृह सचिव को एक्सटेंशन नहीं दिया गया। गृह सचिव का दो साल का कार्यकाल होता है। दरअसल इस तरह से सेवा विस्तार देने का मतलब सरकार ने अपने किसी अधिकारी को इनाम दिया है। वह इनाम किसी भी कारणवश मिल सकता है। उसमें किसी सरकार का कोई राजनीतिक विशेष एजेंडा पूरा होना भी हो सकता है।