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Explainer: लीक-हिंसा से मंत्री के इस्तीफे तक की वजह बनी NTA है क्या; काम कैसे करती है, पहले कब रही सवालों में?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Sun, 26 Jul 2026 05:49 AM IST

सार

पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर एनटीए एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 2024 के विवाद के बाद कानून, सीबीआई जांच और विशेषज्ञ समिति जैसे कदम उठे, लेकिन 2026 में फिर नीट पेपर लीक ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। आइए जानते हैं कि इस बार एनटीए पर क्या एक्शन लिए जा रहे हैं। 
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एनटीए - फोटो : Amar Ujala

छात्रों के लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया। इससे पहले 24 जुलाई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया। ये वो एजेंसी है जिसके ऊपर नीट समेत देश की कई अहम परीक्षाएं कराने की जिम्मेदारी है। नीट पेपर लीक के बाद ये एजेंसी विवादों में है। अब इसके कायाकल्प की बात हो रही है।  

ऐसे में सवाल उठता  है कि आखिर ये एनटीए क्या है? इसे क्यों बनाया गया? इस पर बार-बार सवाल क्यों उठते हैं? एनटीए द्वारा कराई गई परिक्षाओं के कितने पेपर लीक हुए हैं? पहले के पेपर लीक के बाद क्या कार्रवाई की गई? इस पेपर लीक के बाद अब तक क्या-क्या हुआ? अब इसमें क्या बदलाव हो सकते हैं? आइये सभी का सवाल बारी-बारी से जानते हैं...

एनटीए क्या है?

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी केंद्र सरकार की एक स्वायत्त संस्था है। इसकी स्थापना उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं निष्पक्ष, पारदर्शी और एक समान तरीके से कराने के उद्देश्य से की गई थी। एजेंसी का गठन सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत किया गया था। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाना और प्रवेश परीक्षाओं के लिए एक पेशेवर व्यवस्था तैयार करना था।

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एनटीए - फोटो : Amar Ujala
छात्रों के लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया। इससे पहले 24 जुलाई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया। ये वो एजेंसी है जिसके ऊपर नीट समेत देश की कई अहम परीक्षाएं कराने की जिम्मेदारी है। नीट पेपर लीक के बाद ये एजेंसी विवादों में है। अब इसके कायाकल्प की बात हो रही है।  

ऐसे में सवाल उठता  है कि आखिर ये एनटीए क्या है? इसे क्यों बनाया गया? इस पर बार-बार सवाल क्यों उठते हैं? एनटीए द्वारा कराई गई परिक्षाओं के कितने पेपर लीक हुए हैं? पहले के पेपर लीक के बाद क्या कार्रवाई की गई? इस पेपर लीक के बाद अब तक क्या-क्या हुआ? अब इसमें क्या बदलाव हो सकते हैं? आइये सभी का सवाल बारी-बारी से जानते हैं...

एनटीए क्या है?

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी केंद्र सरकार की एक स्वायत्त संस्था है। इसकी स्थापना उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं निष्पक्ष, पारदर्शी और एक समान तरीके से कराने के उद्देश्य से की गई थी। एजेंसी का गठन सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत किया गया था। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाना और प्रवेश परीक्षाओं के लिए एक पेशेवर व्यवस्था तैयार करना था।

एनटीए की स्थापना कब हुई?

केंद्र सरकार ने एनटीए की स्थापना 2017 में की थी। वर्ष 2019 से एजेंसी ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी का आयोजन शुरू किया। इसके बाद धीरे-धीरे कई राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं की जिम्मेदारी भी एनटीए को सौंपी गई।

एनटीए क्या-क्या काम करती है?

एनटीए का मुख्य काम देशभर में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं का आयोजन करना है। इसके अलावा एजेंसी का कहान है कि वे,
  • निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा आयोजित करती है।
  • परीक्षा प्रणाली पर शोध करती है।
  • मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के सुझाव देती है।
  • शिक्षा और पेशेवर मानकों से जुड़ा डाटा और शोध उपलब्ध कराती है।

एनटीए - फोटो : Amar Ujala

एनटीए का ढांचा कैसा है?

एनटीए एक स्वायत्त संस्था है, लेकिन यह शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है। एजेंसी का प्रशासनिक संचालन वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से होता है। परीक्षा आयोजन, प्रश्नपत्र तैयार करना, परीक्षा केंद्रों का प्रबंधन, तकनीकी व्यवस्था, परिणाम जारी करना और परीक्षा सुरक्षा जैसे अलग-अलग कार्यों के लिए विभिन्न इकाइयां काम करती हैं। 

एनटीए - फोटो : Amar Ujala

एनटीए कितनी बार विवादों में आईं?

सबसे बड़ा विवाद 2024 में नीट यूजी परीक्षा के दौरान सामने आया। 5 मई 2024 को हुई परीक्षा के बाद पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगे। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। इसी दौरान यूजीसी नेट जून 2024 परीक्षा भी संभावित गड़बड़ियों की सूचना मिलने के बाद रद्द कर दी गई और उसकी जांच भी सीबीआई को सौंपी गई। इसके बाद 2026 में फिर नीट पेपर लीक का मामला सामने आया। 

पेपर लीक के रिकॉर्ड पर सरकार ने क्या कहा?

सरकार ने 2024 में संसद में स्पष्ट किया था कि देश में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक या अन्य परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों का कोई केंद्रीकृत रिकॉर्ड शिक्षा मंत्रालय के पास नहीं है। सरकार के अनुसार, भर्ती और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षाएं अलग-अलग संस्थाएं आयोजित करती हैं। इसलिए किसी एक मंत्रालय के पास सभी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं का समेकित डेटा उपलब्ध नहीं है।

एनटीए - फोटो : Amar Ujala

2024 के पेपर लीक के बाद सरकार ने क्या-क्या किया?

पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने जांच सीबीआई को सौंपी। तत्कालीन एनटीए महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह को पद से हटा दिया गया था। उन्हें करीब चार महीने तक 'अनिवार्य प्रतीक्षा' पर रखा गया, इसके बाद इस्पात मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया और बाद में उनके मूल कैडर छत्तीसगढ़ वापस भेज दिया गया। इसके बाद सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू किया, जो 21 जून 2024 से प्रभावी हुआ। इसके नियम 23 जून 2024 को अधिसूचित किए गए।

22 जून 2024 को पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स (HLCE) बनाई गई। समिति ने 21 अक्तूबर 2024 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसमें एनटीए को मजबूत बनाने, राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने, परीक्षा प्रणाली में सुधार और हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी बनाने की सिफारिश की गई। इसके बाद 14 नवंबर 2024 को स्टीयरिंग कमेटी का गठन भी कर दिया गया।

2024 की गड़बड़ियों को लेकर सरकार ने क्या बताया?

लोकसभा में शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने साल 2025 में बताया था कि 5 मई 2024 को एनटीए द्वारा आयोजित नीट-यूजी परीक्षा के बाद पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप सामने आए, जिसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। 

सुप्रीम कोर्ट ने 2 अगस्त 2024 के फैसले में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से पूरे देश में व्यवस्थित पेपर लीक या व्यापक स्तर पर ऐसी गड़बड़ी साबित नहीं होती, जिससे पूरी परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई हो। 23 जुलाई के कोर्ट आदेश के बाद 26 जुलाई को संशोधित परिणाम जारी किए गए। सरकार के अनुसार, 22 नवंबर 2024 तक सीबीआई ने पांच आरोपपत्र दाखिल किए और 45 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। वहीं, गड़बड़ी की आशंका के चलते रद्द की गई यूजीसी नेट जून 2024 परीक्षा दोबारा आयोजित कराई गई।

इस बार पेपर लीक के बाद क्या कार्रवाई हुई?

इस साल करीब 20 लाख विद्यार्थी नीट यूजी की परिक्षा में शामिल हुए थे, पेपर लीक होने के मामले के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच 21 जून दोबारा परिक्षा कराई गई। इस पेपर लीक के बाद छात्रों का प्रदर्शन हुआ। 

इसी बीच एनटीए ने 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया। कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी तैयारी है। एनटीए के अधिकारियों का कहना है कि एनटीए का पूरा कायाकल्प किया जाएगा और इसके बाद सुधारात्मक कदम लागू किए जाएंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि एजेंसी की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह कार्रवाई उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी के पंचायती राज मंत्रालय में तबादले के एक दिन बाद सामने आई है।

एनटीए - फोटो : Amar Ujala

एनटीए के नए सिरे से गठन की बात क्यों हो रही है?

लगातार सामने आए विवादों के बाद यह माना जा रहा है कि केवल अधिकारियों को बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसलिए एजेंसी की कार्यप्रणाली, परीक्षा सुरक्षा, प्रशासनिक ढांचे और जवाबदेही में व्यापक बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि सुधार केवल अस्थायी नहीं होने चाहिए, बल्कि स्थायी और संस्थागत होने चाहिए। इसी कारण सरकार से पूछा गया है कि विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में अब तक क्या प्रगति हुई है।

अगर एनटीए का ढांचा बदला तो क्या-क्या बदल सकता है?

विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और हालिया कार्रवाई के आधार पर जिन बदलावों की चर्चा है, उनमें शामिल हैं;
  • आउटसोर्सिंग व्यवस्था में सुधार।
  • निजी वेंडर्स के चयन के नियम सख्त करना।
  • प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और वितरण प्रणाली मजबूत करना।
  • परीक्षा केंद्रों के चयन और निगरानी में बदलाव।
  • पेन एंड पेपर और कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के लिए अलग-अलग मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करना।
  • डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करना।
  • एजेंसी की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना।
  • विशेषज्ञ इकाइयों और नए प्रशासनिक ढांचे का गठन।

एनटीए के अलावा और कौन-कौन सी एजेंसियां राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं कराती हैं?

एनटीए के अलावा देश में कई अन्य संस्थाएं भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित करती हैं।
  • संघ लोक सेवा आयोग (UPSC): भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा (IFS), राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) सहित अखिल भारतीय और केंद्रीय सेवाओं की भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है।
  • कर्मचारी चयन आयोग (SSC): केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और अधीनस्थ कार्यालयों में ग्रुप 'बी' और ग्रुप 'सी' के पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित करता है।
  • रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB): भारतीय रेलवे में तकनीकी और गैर-तकनीकी सहित विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाएं कराता है।
  • बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS): सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO), क्लर्क, स्पेशलिस्ट ऑफिसर (SO) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) की भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है।
  • राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों का संघ (Consortium of NLUs): देश के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (NLUs) में प्रवेश के लिए कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) आयोजित करता है।
  • भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIMs): प्रबंधन संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) आयोजित करते हैं।
  • भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (ICAI): चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनने के लिए फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल परीक्षाएं आयोजित करता है।
  • राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS): स्नातकोत्तर मेडिकल शिक्षा और लाइसेंसिंग से जुड़ी परीक्षाएं, जैसे NEET-PG, NEET-SS और FMGE आयोजित करता है।
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