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क्या है क्लस्टर बम, जिसे लेकर पाकिस्तान फैला रहा झूठ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Sun, 04 Aug 2019 12:05 PM IST
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क्लस्टर बम - फोटो : अमर उजाला
एलओसी पर फायरिंग कर रहे पाकिस्तान को भारतीय सेना मुंहतोड़ जवाब दे रही है। अपने एलीट कमांडो फोर्स के सात जवानों को भारतीय सेना द्वारा मारे जाने के बाद तिलमिलाया पाक अब झूठ फैला रहा है कि भारतीय सेना क्लस्टर बमों का प्रयोग कर रही है। 

पाक के इस झूठ को खारिज करते हुए भारतीय सेना ने कहा कि हम सिर्फ पाकिस्तानी गोलीबारी का जवाब दे रहे हैं। यह आरोप पाकिस्तान के धोखे, छल व झूठ का एक और उदाहरण है।


2008 में अस्तित्व में आए जेनेवा समझौते के अंतर्गत क्लस्टर बमों का उत्पादन और इस्तेमाल प्रतिबंधित है लेकिन, अमेरिका, इराक, उत्तर कोरिया, इस्राइल समेत दुनिया के कई देशों पर इनके प्रयोग करने के आरोप लगते रहे हैं। क्लस्टर बमों को हवा और जमीन दोनों जगहों से दागा जा सकता है।
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क्लस्टर बम - फोटो : अमर उजाला
एलओसी पर फायरिंग कर रहे पाकिस्तान को भारतीय सेना मुंहतोड़ जवाब दे रही है। अपने एलीट कमांडो फोर्स के सात जवानों को भारतीय सेना द्वारा मारे जाने के बाद तिलमिलाया पाक अब झूठ फैला रहा है कि भारतीय सेना क्लस्टर बमों का प्रयोग कर रही है। 

पाक के इस झूठ को खारिज करते हुए भारतीय सेना ने कहा कि हम सिर्फ पाकिस्तानी गोलीबारी का जवाब दे रहे हैं। यह आरोप पाकिस्तान के धोखे, छल व झूठ का एक और उदाहरण है।

2008 में अस्तित्व में आए जेनेवा समझौते के अंतर्गत क्लस्टर बमों का उत्पादन और इस्तेमाल प्रतिबंधित है लेकिन, अमेरिका, इराक, उत्तर कोरिया, इस्राइल समेत दुनिया के कई देशों पर इनके प्रयोग करने के आरोप लगते रहे हैं। क्लस्टर बमों को हवा और जमीन दोनों जगहों से दागा जा सकता है।

क्या है क्लस्टर बम

क्लस्टर बम - फोटो : सोशल मीडिया
क्लस्टर बमों का सबसे पहले प्रयोग द्वितीय विश्वयुद्ध के समय साल 1943 में तत्कालीन सोवियत संघ और जर्मनी की फौजों ने किया था। एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 200 प्रकार के क्लस्टर बम बनाए जा चुके हैं।

एक क्लस्टर बम असल में सैकड़ों छोटे-छोटे बमों का संग्रह होता है। जब इन बमों को दागा जाता है तब ये बीच रास्ते में फट कर बहुत बड़े इलाके को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे टारगेट के आस-पास भी भारी नुकसान पहुंचता है। इसका इस्तेमाल अधिकतर इंफेंट्री यूनिट या दुश्मन देश की सेना के जमावड़े को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है। 

इन देशों में तबाही मचा चुका है क्लस्टर बम

क्लस्टर बम - फोटो : BBC
क्लस्टर बम वियतनाम, लाओस, इराक, कंबोडिया, सीरिया, अफगानिस्तान सहित कई देशों में तबाही मचा चुका है। फिलीस्तीन भी इस्राइल पर इन बमों के प्रयोग को लेकर कई बार आरोप लगा चुका है। वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में विरोध प्रदर्शन करने वाले लोग बार-बार यह आरोप लगाते हैं। हालांकि इस्राइल ने हमेशा इन आरोपों को नकारा है। 

अमेरिका ने खाड़ी युद्ध के दौरान इस बम का खूब उपयोग किया था। अमेरिका ने अफगानिस्तान युद्ध के दौरान पहाड़ियों में छिपे तालिबान लड़ाको को मारने के लिए अपने लड़ाकू विमानों से खूब क्लस्टर बम दागे। जिससे बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए थे।

भारत और पाक दोनों नहीं है संधि में शामिल

भारतीय सेना
2008 में डबलिन में कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशन नाम से अंतरराष्ट्रीय संधि अस्तित्व में आई। इस संधि के तहत क्लस्टर बमों को रखने, बेचने या इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई थी। इस संधि में शामिल देशों को इसे मानने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। 

दुनिया के कई देशों ने इस संधि का विरोध किया और इसके सदस्य नहीं बने। जिसमें भारत, रूस, अमेरिका, चीन, पाकिस्तान और इस्राइल शामिल थे। सितंबर 2018 तक इस संधि पर दुनिया के 108 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं।
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