एसआईआर को लेकर टीएमसी-भाजपा में जुबानी जंग
टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि चुनाव आयोग बहुत ही कम समय सीमा के अंदर एसआईआर कर रहा है। जब 2002 में एसआईआर हुई थी, तो यह चुनावों के बाद की गई थी और पूरी प्रक्रिया में 2 साल से अधिक का समय लगा था। अब, भाजपा के दबाव में चुनाव आयोग की तरफ से की जा रही एसआईआर व्यवस्थित तरीके से नहीं की जा रही है।' वहीं केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि 'चुनाव आयोग के नियम-कायदों में साफ तौर पर लिखा है कि बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म बांटेंगे। लेकिन कई जगहों पर बीएलओ ऐसा नहीं कर रहे हैं और कई जगहों पर बीएलओ के तृणमूल कांग्रेस के नेताओं से संबंध पाए गए हैं। कुछ बीएलओ तृणमूल कांग्रेस के डर से तृणमूल कांग्रेस के पार्टी दफ्तर से ही फॉर्म बांट रहे हैं। अगर ऐसा होगा, तो एसआईआर कैसे होगा?'
नादिया में बुजुर्ग की मौत, परिवार ने SIR को बताया वजह
वहीं नादिया जिले में एक 70 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। उसके परिवार का आरोप है कि राज्य में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ी चिंता के कारण उसकी मौत हुई। मृतक की पहचान श्यामल कुमार साहा के रूप में हुई है। वह ताहिरपुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत कृष्णचकपुर मंडलपारा का निवासी था और एसआईआर की चिंता के कारण उसने खाना-पीना छोड़ दिया था। जानकारी के मुताबिक, मृतक एक फेरीवाला था।
वैध दस्तावेज होने के बावजूद भी डरा हुआ था बुजुर्ग
परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि 2002 की मतदाता सूची में अपना नाम न होने की जानकारी मिलने के बाद से मृतक ने खाना-पीना छोड़ दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उसके पास सभी वैध दस्तावेज थे। हमें इस मौत की जानकारी मिली है, लेकिन परिवार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। जांच से पता चला है कि साहा के पास मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड और संपत्ति के कागजात समेत सभी वैध दस्तावेज होने के बावजूद, मतदाता सूची के एसआईआर की घोषणा के बाद से वह डरा हुआ था। उनकी पत्नी ने कहा, 'वह मुश्किल से कुछ खा पाते थे और हमेशा चिंता में रहते थे।' इस मामले में स्थानीय तृणमूल कांग्रेस के नेता और पंचायत सदस्य साहा के परिवार से मुलाकात की है।
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