विश्व भारती यूनिवर्सिटी का दावा है कि लीज के तहत अमर्त्य सेन के पास 125 डेसिमल जमीन होनी चाहिए, लेकिन अभी उनके पास 138 डेसिमल जमीन है। यानी उन्होंने 13 डेसिमल जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। बीते गुरुवार को इस बारे में यूनिवर्सिटी ने राज्य सरकार को पत्र भी लिखा, जिसमें कहा कि उसके दर्जनों प्लॉट पर अवैध कब्जा किया गया है। अवैध कब्जाधारकों में अमर्त्य सेन भी शामिल हैं। इसके बाद ममता ने सेन को पत्र लिखा है।
सेन के नाना यूनिवर्सिटी की स्थापना में शामिल थे
रवींद्रनाथ टैगोर ने अमर्त्य सेन के नाना क्षितिमोहन सेन को वर्ष 1908 में शांति निकेतन में आमंत्रित किया था। क्षितिमोहन सेन संस्कृत के विद्वान थे। टैगोर के समय ही यहां कई विद्वानों को 99-99 साल की लीज पर प्लॉट दिए गए। एक प्लॉट क्षितिमोहन सेन के दामाद और अमर्त्य सेन के पिता को भी दिया गया। सेन शांति निकेतन में मौजूद घर में पले-बढ़े। इतना ही नहीं, उन्हें अमर्त्य नाम भी टैगोर ने ही दिया था। वर्ष 1951 में विश्व भारती को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाया गया।
कहा, हम किसानों के साथ हैं
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक महीने से दिल्ली में हो रहे किसाना आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा, हम किसानों के साथ हैं। हम मांग करते हैं कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए।