कोलकाता की सीबीआई विशेष अदालत ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की जमानत याचिका खारिज कर दी और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। स्कूल नौकरी घोटाले के संबंध में न्यायिक हिरासत खत्म होने के दिन पार्थ को अलीपुर अदालत में पेश किया गया। इस मौके पर उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के 25वें स्थापना दिवस (एक जनवरी) से पहले पार्टी की और सफलता की कामना की। साथ ही उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।
चटर्जी की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए अदालत ने उन्हें सीबीआई की अर्जी पर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सीबीआई पश्चिम बंगाल के एसएससी भर्ती घोटाले की जांच कर रही है। वहीं, पार्थ चटर्जी के वकीलों ने कहा कि मामले में कोई नया विकास नहीं हुआ है और उन्हें हिरासत में रखने से जांच का कोई उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है।
सीबीआई के वकीलों ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए और उनकी न्यायिक रिमांड के विस्तार की मांग करते हुए दावा किया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और उन्हें इस समय जमानत पर रिहा करने से जांच प्रभावित हो सकती है।
ईडी ने पहली बार पार्थ को किया था गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 जुलाई, 2022 को पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने चटर्जी को पार्टी के महासचिव सहित सभी पदों से हटा दिया था। साथ ही सीएम ममता बनर्जी ने उन्हें मंत्री पद से हटा दिया था। पूर्व मंत्री पार्थ ने 2014 से 2021 तक शिक्षा विभाग संभाला, इस दौरान राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति में घोटाला हुआ। सीबीआई भी मामले में भ्रष्टाचार की जांच कर रही है। जांच के सिलसिले में उनसे चटर्जी को भी गिरफ्तार किया था।
इससे पहले पार्थ चटर्जी ने दावा किया था कि ममता बनर्जी नीत पार्टी को कोई भी व्यक्ति किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा सकता। पार्थ की करीबी सहयोगी के आवास से नकदी, जेवर और संपत्ति दस्तावेज बरामद होने के बाद इस साल 23 जुलाई को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश पर भर्ती घोटाले की जांच कर रहा है। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय मामले से जुड़े धन की हेराफेरी के पहलू की जांच कर रहा है।