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Sandeshkhali: हाईकोर्ट से पीड़िताओं को पक्ष रखने की अनुमति मिली; शाहजहां के घर-ऑफिस पर CBI को ताला लटका मिला

Thu, 07 Mar 2024 05:37 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने संदेशखाली में हुई कथित बर्बरता के मामले में पीड़ितों को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति दे दी है। हाईकोर्ट के इस अहम आदेश के बाद संदेशखाली में हुए कथित बर्बर कृत्य मुकदमे के रिकॉर्ड का हिस्सा बनने के साथ-साथ अहम कानूनी दस्तावेज भी बन जाएंगे।
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कलकत्ता हाई कोर्ट। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने संदेशखाली मामले में पीड़ित महिलाओं को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति दे दी। गुरुवार को अदालत ने याचिकाकर्ता को आवेदन/शपथ पत्र दाखिल करने की अनुमति देते हुए कहा कि संदेशखाली के कथित पीड़ित जो कुछ भी इस अदालत के सामने रखना चाहते हैं उसे रिकॉर्ड पर लाने के लिए हलफनामा दाखिल करें। संदेशखाली मामले में याचिकाकर्ता-वकील प्रियंका टिबरेवाल ने दो जजों की खंडपीठ के समझ इस मुद्दे को उठाया। 
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बता दें कि संदेशखाली में महिलाओं पर कथित यौन अत्याचार और जमीन हड़पने के संबंध में हाईकोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई कर रहा है। तीन जनहित याचिकाओं पर जारी सुनवाई में 80 पीड़ित महिलाएं अदालत की कार्यवाही में शामिल होना चाहती हैं। वकील प्रियंका ने बताया कि अपने अनुभव साझा करने के लिए इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को अदालत में पेश करना चुनौतीपूर्ण है। 
 
चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम की पीठ ने भी स्वीकार किया कि सभी पीड़िताओं को अदालत में लाना मुश्किल है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रियंका को इस मामले में आवेदन / पूरक हलफनामा दायर करने की अनुमति दे दी। जिस पीठ में सुनवाई हो रही है, इसमें न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य भी शामिल हैं।
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हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पीड़ितों के बयान को उचित रूप से प्रमाणित किया जाना चाहिए। पड़ितों की पहचान को भी स्थापित किया जाना चाहिए। अदालत ने साफ किया कि अगर  कथित पीड़ितों का हलफनामा स्थानीय भाषा में है, तो याचिकाकर्ता इसकी अनुवादित प्रतियां प्रस्तुत करें।

एक अन्य याचिकाकर्ता-वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि संदेशखाली में यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने के मामलों की जांच सीबीआई को स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं। इस मामले में मुख्य आरोपी शाहजहां शेख के वकील ने कहा कि वह भी पीड़िताओं के कथनों पर जवाब अदालत के रिकॉर्ड पर लाना चाहते हैं। शाहजहां के वकील की प्रार्थना पर अलख आलोक श्रीवास्तव ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि आरोपी को जांच स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका में सुनवाई का कोई अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने स्वीकार किया कि श्रीवास्तव का तर्क उचित है।

हलफनामे दाखिल करने का भी निर्देश
अदालत ने आरोपियों को अन्य तीन रिट याचिकाओं में हलफनामा दायर करने की छूट दी। एक मामला स्वत: संज्ञान वाला है, जबकि संदेशखाली की घटनाओं पर दो जनहित याचिकाएं भी सुनी जा रही हैं। हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार, भारत सरकार और सीबीआई को मामलों के संबंध में अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का भी निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश देते हुए कहा कि इन सभी चार मामलों पर 4 अप्रैल को फिर से सुनवाई होगी।

सीबीआई टीम को शाहजहां के घर और कार्यालय पहुंची; लटका मिला ताला
निलंबित तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख की बुधवार को हिरासत मिलने के एक दिन बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को संदेशखाली के सरबेरिया में उनके घर और कार्यालय का दौरा किया। टीम ने दोनों परिसरों पर ताला लटका मिलने के बाद बाहर से ही वहां की तस्वीरें लीं।

केंद्रीय बलों की सुरक्षा में अधिकारियों की टीम ने बाजार में ग्रामीणों से बातचीत भी की। शेख और उसके सहयोगी शिब प्रसाद हाजरा, उत्तम सरदार और अन्य पर संदेशखाली में यौन शोषण और जमीन हड़पने का आरोप है। 55 दिनों तक फरार रहने के बाद शेख को 29 फरवरी को सुंदरबन के बाहरी इलाके संदेशखाली द्वीप से लगभग 30 किमी दूर मिनाखान इलाके के एक घर से पकड़ा गया था। शेख पर राशन घोटाला मामले में उनके घर पर छापे के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हमले के संबंध में नजात पुलिस स्टेशन में दो मामले दर्ज थे।
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