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बढ़ा TMC के बागियों का कुनबा: अब खुलकर बगावत पर उतरे सुदीप बंदोपाध्याय, दीदी को सिर्फ मार्गदर्शक बनाने पर अड़े

Sun, 14 Jun 2026 07:29 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, कोलकाता।

सार

पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर का असंतोष अब एक बड़े विभाजन में बदल चुका है। वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय के बागी खेमे में शामिल होने से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक साख को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। खबरों के अनुसार, टीएमसी का यह बागी धड़ा 22 सांसदों के समर्थन के साथ बहुत जल्द राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होकर केंद्र सरकार को समर्थन दे सकता है।
 
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टीएमसी में बगावत - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कोलकाता में रविवार का दिन ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए किसी झटके से कम नहीं रहा। तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने अब खुलकर बगावत कर दी है। वे पार्टी के बागी खेमे के साथ औपचारिक रूप से जुड़ गए हैं। बागियों का मकसद अब पार्टी के संसदीय दल पर अपना पूरा नियंत्रण करना है। वे चाहते हैं कि ममता बनर्जी सिर्फ एक सलाहकार की भूमिका निभाएं।
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बागी गुट का दावा है कि दो और सांसद जल्द ही उनके साथ आने वाले हैं। इसके बाद लोकसभा में उनके समर्थकों की संख्या बढ़कर 22 हो जाएगी। 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को मिली करारी हार के बाद से ही पार्टी में बिखराव शुरू हो गया था। अब ये बागी सांसद सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलेंगे। वे संसद में एक अलग गुट के तौर पर अपनी पहचान की मांग करने वाले हैं।

सुदीप के साथ से बागियों की ताकत बढ़ी
सुदीप बंदोपाध्याय बरसों तक दिल्ली में पार्टी की आवाज रहे हैं। 2011 से 2025 तक वे लोकसभा में टीएमसी के नेता भी थे। उनके बागी खेमे में आने से समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। सुदीप का कहना है कि पार्टी के कई सांसद और विधायक यही चाहते हैं कि ममता बनर्जी केवल एक मार्गदर्शक के तौर पर बनी रहें। उन्होंने कहा कि सिर्फ इसीलिए मैं इन सांसदों का साथ देने आया हूं। 
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दिल्ली में चल रहा है सियासी 'खेल'!
यह पूरा घटनाक्रम बंगाल विधानसभा के बागी विधायकों से मिलता-जुलता है। वहां ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में पहले ही ममता को मेंटर बताकर संगठन पर कब्जा कर लिया गया है। सुदीप बंदोपाध्याय अभी भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। उन्होंने अभी बागी नेताओं की पिटीशन पर दस्तखत नहीं किए हैं। वे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से व्यक्तिगत मुलाकात करना चाहते हैं।

इस बीच, सुदीप की सक्रियता ने दिल्ली की सरगर्मी बढ़ा दी है। उन्होंने शनिवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से लंबी मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी देर रात तक गुप्त मंत्रणा की। इतना ही नहीं, रविवार को भी वे भूपेंद्र यादव के घर पर रणनीति बनाते देखे गए।
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लोकसभा में भी एनडीए को फायदा?
काकोली घोष दस्तीदार के मुताबिक, बागियों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। लोकसभा में 28 में से 19 सांसद पहले ही बगावत कर चुके थे। अब सुदीप के आने के बाद यह संख्या और मजबूत हो गई है। बागी गुट का साफ कहना है कि अलग मान्यता मिलते ही वे संसद में भाजपा की एनडीए सरकार को समर्थन देंगे। टीएमसी की यह जंग अब राज्य विधानसभा और दिल्ली के संसद, दोनों जगह चरम पर है। ममता खेमे ने इस बगावत को रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है, लेकिन बागी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

यह भी पढ़ें: केंद्रीय मंत्री के संपर्क में असंतुष्ट गुट: ममता खेमे का अगला कदम क्या, कल्याण बनर्जी और सौगत रॉय क्या बोले?
 
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