पश्चिम बंगाल की राजनीति और नेताओं के दल छोड़ने या पाला बदलने जैसी घटनाएं बीते तीन महीने से अधिक समय से लगातार चर्चा में हैं। ताजा घटनाक्रम में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा है कि मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों से उनका मोहभंग हो चुका है।
चार महीने के भीतर पार्टी से इस्तीफा
तृणमूल छोड़ने के बाद चंद्र कुमार बोस ने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल की राजनीति में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने अप्रैल में तृणमूल ज्वाइन की थी और चार महीने के भीतर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
क्या नेताजी के सिद्धांतों पर नया राजनीतिक मंच?
चंद्र कुमार बोस ने कहा कि उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक, भाजपा और तृणमूल में काम किया है। अब वह मुख्यधारा की पार्टियों से निराश हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति नेताजी की विचारधारा पर आधारित है। वह नेताजी के समावेशी राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर एक नया राजनीतिक मंच बनाना चाहते हैं।
2016 में भाजपा का दामन थामा, सात साल बाद मोहभंग
उन्होंने कहा है कि युवाओं को सलाह देने के अलावा वे नेताजी के आदर्शों पर एक नई पार्टी बना रहे हैं। तृणमूल की ओर से इस पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे पहले चंद्र कुमार बोस ने साल 2016 में भाजपा ज्वाइन की थी। वह भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे और चुनाव भी लड़े थे। साल 2023 में उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी।