नई दिल्ली में सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव के बीच हुई बैठक में दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, माइनिंग और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी की व्यापक समीक्षा करने के साथ क्षेत्रीय चुनौतियों और बहुपक्षीय सहयोग पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। सैदोव इन दिनों भारत की यात्रा पर हैं।
किन क्षेत्रों पर रहा दोनों देशों का खास फोकस?
बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा के दौरान ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, व्यापार, रक्षा, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अलावा दोनों देशों ने क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा की और बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर भी विचार साझा किए।
भारत ने उज्बेकिस्तान को क्यों बताया विस्तारित पड़ोस का हिस्सा?
बैठक की शुरुआत में जयशंकर ने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान को अपने विस्तारित पड़ोस का हिस्सा मानता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों, विचारों और वस्तुओं का आदान-प्रदान लंबे समय से होता रहा है तथा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध काफी गहरे हैं। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है।
क्या माइनिंग और व्यापार में भी बढ़ेगा सहयोग?
जयशंकर ने कहा कि भारत अब माइनिंग क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाना चाहता है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार करीब एक अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, लेकिन इसमें अभी और वृद्धि की पर्याप्त संभावना है।
आतंकवाद और क्षेत्रीय चुनौतियों पर क्या बनी सहमति?
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान आतंकवाद, उग्रवाद और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों पर समान सोच रखते हैं। उन्होंने आतंकवाद के सभी स्वरूपों के खिलाफ उज्बेकिस्तान सरकार और वहां के लोगों के रुख की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद और आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों के प्रति हमेशा शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात में क्या चर्चा हुई?
भारत दौरे के दौरान उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने राजनीतिक संवाद को और मजबूत बनाने, व्यापार, आर्थिक एवं निवेश सहयोग बढ़ाने तथा सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों को विस्तार देने पर चर्चा की। साथ ही क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तथा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।