ऐसा कहा जा रहा है कि जिस तरह से तृणमूल के वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया कि मंगलवार को पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी, सौगत रॉय और सुदीप बंदोपाध्याय के अलावा चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ हुई बैठक के बाद वे सभी मतभेद दूर हो गए हैं, उससे अधिकारी नाराज हैं।
सूत्रों ने बताया कि अधिकारी पर्दे के पीछे हुई बैठक में क्या बात हुई, वह मीडिया में लीक नहीं करना चाहते हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार बैठक के बाद से अधिकारी से संपर्क नहीं हो पा रहा है।, उन्हें मंगलवार और बुधवार को बार-बार फोन किया गया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि अधिकारी ने पार्टी नेतृत्व को संदेश दिया है, ‘उनके लिए पार्टी के साथ मिलकर काम करना मुश्किल होगा क्योंकि नेताओं ने उनके द्वारा उठाई की समस्याओं का समाधान किए बिना और उन्हें बोलने का मौका दिए बिना मीडिया में झूठे दावे किए हैं।’
तृणमूल कांग्रेस के एक अन्य नेता ने पहचान गोपनीय रखते हुए कहा कि शुभेंदु अधिकारी इस बात से नाराज हैं कि रॉय ने मंगलवार रात को जल्दबाजी करते हुए दावा कर दिया कि सभी मुद्दों का समाधान हो गया है। जबकि छह दिसंबर को संवाददाता सम्मेलन का आयोजन होना था।
शुभेंदु अधिकारी के करीबी नेता ने कहा, ‘शुभेंदु दा ने बैठक के बाद अपना रुख बताने के लिए कुछ समय मांगा था लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं ने दूसरी ही तस्वीर पेश करने की कोशिश की। उन्हें यह पसंद नहीं आया और अब सबकुछ खत्म हो गया है।’
इस बीच, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘तृणमूल कांग्रेस रोज नए हथकंडे के साथ सामने आ रही है। अब वह रंगे हाथ पकड़ी गई है। कोई भी सक्षम नेता, तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टी में कभी स्थान नहीं पा सकता।’
गौरतलब है कि नंदीग्राम आंदोलन का चेहरा रहे अधिकारी ने पिछले हफ्ते राज्य के परिवहन, सिंचाई और जलमार्ग मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे अटकलें लगने लगी थीं कि वह अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को छोड़ सकते हैं।
कई मौकों पर पार्टी नेतृत्व के प्रति शिकायतों का इजहार कर चुके असंतुष्ट विधायक अधिकारी पूर्वी मेदिनीपुर जिले के शक्तिशाली अधिकारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी और भाई दिव्येंदु अधिकारी क्रमश: तामलुक और कंठी लोकसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के सांसद हैं।
अधिकारी का पश्चिमी मेदिनीपुर, बांकुड़ा, पुरुलिया, झाड़ग्राम और बीरभूम के कुछ हिस्सों और अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले के अंतर्गत आने वाली 40-45 विधानसभा सीटों पर खासा प्रभाव है। गौरतलब है कि राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए अगले वर्ष अप्रैल-मई में चुनाव होना है।