पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ (फाइल फोटो)
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पश्चिम बंगाल में वेतनवृद्धि की मांग में अनशन पर बैठे पैरा-शिक्षकों की हालत गंभीर होती जा रही है। बृहस्पतिवार को यहां भूख हड़ताल में हिस्सा लेने वाली महिला पैरा शिक्षक रेवती राउत की तबियत बिगड़ जाने की वजह से मौत हो गई थी। वहीं टीएमसी सासंद सुदीप बंदोपाध्याय ने मौत की खबर को गलत बताया।
उन्होंने दावा किया राज्य सरकार की छवि को खराब करने के लिए भाजपा ऐसा झूठा प्रचार कर रही है। इस बीच, राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने सभी पक्षों से इस समस्या को बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील की है। उधर इस मामले की गूंज संसद में सुनाई दी।
वेतनवृद्धि समेत अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में एक हजार से भी ज्यादा पैरा शिक्षक 11 नवंबर से आंदोलन कर रहे हैं। इनमें से तीन दर्जन से ज्यादा लोग बीते आठ दिनों से यहां शिक्षा मंत्रालय के समक्ष बेमियादी भूख हड़ताल पर हैं। दरअसल, यह शिक्षक सरकारी स्कूलों में ठेके पर काम करते हैं।
पैरा टीचर एक्य मंच के सह संयोजक भागरथी घोष ने बताया कि फिलहाल 37 पैरा शिक्षक बेमियादी हड़ताल पर हैं। इनमें से 10 की हालत खराब है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अब तक उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया है।
घोष के मुताबिक, प्राथमिक स्कूलों व हाईस्कूलों में पढ़ाने वाले इन शिक्षकों को हर महीने क्रमश: 10 हजार और 13 हजार रुपये मिलते हैं। संगठन इसे बढ़ा कर 22 से 25 हजार तक करने की मांग कर रहा है।
उधर भाजपा के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि ममता सरकार अहंकार में चूर है और वह पैरा टीचरों की बात नहीं सुन रही है। यह बड़े ही शर्म की बात है कि हजारों शिक्षक हड़ताल पर हैं, एक की मौत हो गई, लेकिन ममता सरकार ने इस पर चुप्पी साधी हुई है।