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Supreme Court: 'यौन इच्छा पर नियंत्रण रखना चाहिए', कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बताया गलत

Thu, 04 Jan 2024 08:28 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट बेंच ने रजिस्ट्री विभाग को निर्देश दिया कि स्वतः संज्ञान वाली याचिका और राज्य सरकार की याचिका को 12 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दें।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को किशोरियों को ''यौन इच्छाओं पर नियंत्रण'' रखने की बात कहने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस फैसले में कुछ पैराग्राफ ''समस्या पैदा करने वाले'' हैं और इस तरह के फैसले लिखना ''बिल्कुल गलत'' है।   

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पश्चिम बंगाल सरकार ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि उसने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल आठ दिसंबर को फैसले की आलोचना की थी और उच्च न्यायालय की कुछ टिप्पणियों को ''बेहद आपत्तिजनक और पूरी तरह अनुचित'' करार दिया था। 

शीर्ष अदालत ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए याचिका दायर की थी और कहा था कि न्यायाधीशों से फैसला लिखते समय 'उपदेश' देने की उम्मीद नहीं की जाती है। न्यायमूर्ति एएस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ के समक्ष गुरुवार को यह मामला सुनवाई के लिए आया। पश्चिम बंगाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने पीठ को सूचित किया कि राज्य ने उच्च न्यायालय के पिछले साल 18 अक्टूबर के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दायर की है।
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पीठ ने कहा, ''अपील आज इस अदालत की एक अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई। दुर्भाग्य से वह पीठ बैठ नहीं सकी। पीठ ने कहा कि स्वत: संज्ञान लेते हुए दायर रिट याचिका और राज्य सरकार की अपील पर एक साथ सुनवाई करनी होगी।"

इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि उन्होंने भी कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें हाईकोर्ट ने लड़कियों से उनकी यौन इच्छा पर नियंत्रण रखने की सलाह दी थी। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की और बीती 8 दिसंबर को हाईकोर्ट के इस फैसले की आलोचना की थी। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने फिर इस मामले पर सुनवाई की। 

फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची बंगाल सरकार
गुरुवार की सुनवाई में पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी भी सरकार की तरफ से कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने पीठ को बताया कि राज्य सरकार ने भी बीती 18 अक्तूबर को दिए हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की हुई है। अहमदी ने बताया कि उनकी याचिका पर गुरुवार को एक अन्य पीठ सुनवाई करने वाली थी लेकिन पीठ नहीं बैठी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट बेंच ने रजिस्ट्री विभाग को निर्देश दिया कि स्वतः संज्ञान वाली याचिका और राज्य सरकार की याचिका को 12 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दें, लेकिन इसके लिए पहले मुख्य न्यायाधीश से मंजूरी ले लें।

कलकत्ता हाईकोर्ट की टिप्पणी पर हुआ था विवाद
उल्लेखनीय है कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सलाह दी थी कि 'लड़कियों को अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए और दो मिनट के सुख के फेर में नहीं पड़ना चाहिए। साथ ही हाईकोर्ट ने लड़कों को भी लड़िकयों की इज्जत करने की सलाह दी थी और कहा कि लड़कों को इसके लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।'

सुप्रीम कोर्ट ने की थी आलोचना
इस फैसले की आलोचना करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बीती 8 दिसंबर को कहा कि जजों से उम्मीद की जाती है कि वह अपने निजी विचारों को साझा ना करें या भाषण ना दें। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किशोरों के अधिकारों का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से हाईकोर्ट के फैसले पर राज्य सरकार से जवाब मांगा था। जिस पर अब राज्य सरकार ने बताया कि उन्होंने भी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की हुई है। 

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