अगर मुख्यमंत्री फ्लोर टेस्ट में विफल रहते हैं और फिर भी पद छोड़ने से इनकार करते हैं, तो राज्यपाल के पास मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने की शक्तियां होती हैं। हालांकि, यह पूरी स्थिति तभी लागू होती है, अगर नई विधानसभा गठित हो चुकी है। पश्चिम बंगाल में फिलहाल ताजा चुनाव हुए हैं और अब तक विधानसभा का गठन नहीं हुआ है।
2. चुनाव में हार या कार्यकाल खत्म होने पर
जब विधानसभा चुनाव में सत्तासीन दल हार जाता है तो आम प्रक्रिया यह कि उस दल का नेता खुद ही जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपता है, जिसके बाद राज्यपाल नई सरकार के गठन के लिए सबसे बड़े दल को आमंत्रित करते हैं। हालांकि, अगर कोई मुख्यमंत्री हार के बावजूद व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा न भी दें तो पुरानी विधानसभा का कार्यकाल खत्म होते ही सरकार का कानूनी वजूद खत्म हो जाता है।
इस लिहाज से देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में सरकार का कार्यकाल 7 मई तक ही है। इसके बाद चुनी हुई सरकार का कार्यकाल खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा और इसी के साथ मुख्यमंत्री पद भी अपने आप ही खाली हो जाएगा। यानी ममता बनर्जी इस पद से बिना इस्तीफा दिए ही हट जाएंगी और राज्यपाल को नई सरकार के गठन के लिए सबसे बड़े दल को बुलाना पड़ेगा। इसके बाद नए मुख्यमंत्री के शपथ लेते ही पिछला प्रशासन अपने आप खत्म हो जाता है और नई सरकार का शासन शुरू होता है।
3. सांविधानिक संकट और राष्ट्रपति शासन
अगर किसी राज्य में सरकार के शासन के दौरान मुख्यमंत्री के इस्तीफा न देने से गतिरोध पैदा हो जाए और कोई अन्य दल सरकार बनाने की स्थिति में न हो तो...
4. छह महीने के भीतर निर्वाचित न होने पर
अगर कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बना है, लेकिन वह विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है तो संविधान के अनुच्छेद 164(4) के मुताबिक, अगर वह शपथ लेने के छह महीने के अंदर सदन के सदस्य नहीं बन पाते, तो उसे अपने आप पद छोड़ना होगा। हालांकि, यह स्थिति भी तभी लागू होती है, जब राज्यपाल पहले ही किसी दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर चुके हों और सीएम का शपथग्रहण राज्यपाल की ही मौजूदगी में पूरा हुआ हो। इन दोनों स्थितियों के बिना कोई व्यक्ति सीएम नहीं बन सकता।
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