तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पश्चिम बंगाल की सत्ता से जाने के बाद अब अपनों ने ही पार्टी को घेरा है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और टीएमसी के निवर्तमान विधायक मनोज तिवारी ने तृणमूल ने अपना पत्ता काट लिया। मनोज यहीं नहीं रुके और उन्होंने ममता बनर्जी की पार्टी पर टिकट के बदले रुपये मांगने का आरोप लगाया है। मनोज तिवारी का कहा कि टीएमसी ने उन्हें हावड़ा की शिबपुर सीट से टिकट इसलिए नहीं दिया क्योंकि उन्होंने इसके बदले पांच करोड़ रुपये नहीं दिए थे।
भाजपा ने टीएमसी को सत्ता से किया बेदखल
- मनोज तिवारी ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री थे, लेकिन पार्टी ने इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया था।
- टीएमसी को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा।
- ममता का 15 साल का कार्यकाल हालिया विधानसभा चुनावों में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बड़ी जीत के साथ समाप्त हो गया।
- भाजपा ने कुल 207 सीटें अपने नाम की, जबकि टीएमसी को 80 सीटों से ही संतोष करना पड़ा।
'टीएमसी की हार से नहीं हुई हैरानी'
भारत के 40 वर्षीय पूर्व बल्लेबाज और बंगाल क्रिकेट के इतिहास में सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी (10,195 प्रथम श्रेणी रन) ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में खेल राज्य मंत्री थे। तिवारी ने कहा, इस करारी हार से मुझे बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई है। जब पूरी पार्टी ही भ्रष्टाचार में लिप्त हो और किसी भी क्षेत्र में कोई विकास नहीं हुआ हो तो ऐसा होना ही था। सिर्फ वही लोग टिकट खरीद पाए जो भारी-भरकम रकम दे सकते थे। इस बार कम से कम 70 से 72 उम्मीदवारों ने टिकट पाने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये दिए। मेरे से भी पैसे मांगे गए थे लेकिन मैंने देने से मना कर दिया। यह तो देखिए कि जिन लोगों ने पैसे दिए उनमें से कितने लोग चुनाव जीत पाए हैं। जहां तक तृणमूल की बात है तो मेरे लिए अब वह अध्याय पूरी तरह से खत्म हो चुका है।
तिवारी ने टीएमसी पर आरोपों की बौछार की
- तिवारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है।
- उन्होंने कहा, मैंने ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया है जहां तृणमूल के सभी मंत्रियों को बुलाया जाता था। मुझे राज्य मंत्री के नाम पर बस एक लॉलीपॉप थमा दिया गया था, जिसका असल में कोई मतलब ही नहीं था।
- तिवारी ने कहा, अगर मैं खड़ा होकर कहता कि दीदी, मैं आपका ध्यान एक खास समस्या की ओर दिलाना चाहता हूं। तो वह बीच में ही हमें रोक देतीं और कहतीं थी कि मेरे पास तुम लोगों के लिए समय नहीं है।
- इस पूर्व क्रिकेटर ने कहा, वे बस विकास कार्यों में अड़ंगा डालते रहते थे जबकि वे बहुत ही बुनियादी काम थे। मैं आपको बता सकता हूं कि मैंने जो कुछ काम करवाए वे सिर्फ विधायक कोष से ही नहीं बल्कि परियोजनाओं को पूरा करने के लिए मैंने अपनी जेब से भी पैसे दिए।