सुवेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को बंगाल के पूरबा मेदिनीपुर जिले के करकुली में हुआ था। प्रभावशाली जनाधार वाले नेता माने जाने वाले अधिकारी ने कांधी पीके कॉलेज से स्नातक किया और यहीं से राजनीति में प्रवेश किया था। 2006 में 36 साल की आयु में सुवेंदु पहली बार कांधी दक्षिण सीट से विधायक बने थे।
इसी साल वह कांथी नगर पालिका के चेयरमैन भी नियुक्त किए गए थे। साल 2009 और 2014 में वह लोकसभा भी पहुंचे। साल 2016 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम विधानसभा सीट से भारी जीत हासिल की थी। इस बार भी वह इसी सीट से लड़ रहे हैं और टीएमसी से उनके सामने खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं।
साल 2007 में हुए नंदीग्राम आंदोलन से ही बंगाल की राजनीति में ममता का प्रवेश हुआ था। इस आंदोलन ने राज्य में दशकों तक रही वाम दलों की सत्ता को उखाड़ फेंका था। बता दें कि इस आंदोलन का खाका सुवेंदु ने ही तैयार किया था। अधिकारी ने ही मेदिनीपुर, पुरुलिया जैसे जिलों में टीएमसी को मजबूत किया था।
तब अधिकारी कांथी दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक थे। उन्होंने भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति के तहत लोगों को जमा किया और वाम सरकार के खिलाफ भूमि आंदोलन को रफ्तार दी। जब वाम दल की जीत तय मानी जा रही थी तब सुवेंदु अधिकारी ने ही सीबीआई एम के बाहुबली उम्मीदवार लक्ष्मण सेठ को हराया था।
एक समय पश्चिम बंगाल सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले सुवेंदु अधिकारी बीते दिनों पार्टी और मंत्री पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे। इस्तीफा देने से पहले अधिकारी परिवहन मंत्री का पद संभाल रहे थे। सुवेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बवाल खड़ा हो गया था।
अधिकारी की ममता से नाराजगी इस बात से थी कि वह पार्टी के दूसरे नेताओं की तुलना में अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को ज्यादा तरजीह दे रही थीं। हालांकि, सुवेंदु ने पार्टी में रहते हुए इस बारे में कभी खुलकर नहीं कहा। लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद वह लगातार ममता और अभिषेक दोनों पर हमलावर रहे हैं।
जिस तरह से भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ उम्मीदवार बनाया है, पार्टी अधिकारी के जनाधार और प्रभाव दोनों को समझ रही है। अगर इस विधानसभा चुनाव में भाजपा जीत हासिल करती है तो आश्चर्य की बात नहीं होगी कि सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद की पेशकश कर दी जाए।