ममता बनर्जी ने कहा कि जब मैं रेल मंत्री थी तो हमारे पास विभिन्न रेलवे विभागों, जैसे वित्त, कर्मचारी कल्याण, सिग्नलिंग, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल के लिए कैबिनेट रैंक के छह सचिव रखने का विकल्प था। उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में मदद की। आज यह समन्वय समाप्त हो गया है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर हमला करते हुए दावा किया कि जिस दिन अलग से रेल बजट पेश करने का चलन बंद हुआ, उसी दिन से भारतीय रेल तबाह हो गई। गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने वर्षों पुरानी प्रथा को समाप्त करते हुए 2017 में रेल बजट का केंद्रीय बजट में विलय कर दिया था।
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बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा, जब मैं रेल मंत्री थी तो हमारे पास विभिन्न रेलवे विभागों, जैसे वित्त, कर्मचारी कल्याण, सिग्नलिंग, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल के लिए कैबिनेट रैंक के छह सचिव रखने का विकल्प था। उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में मदद की। आज यह समन्वय समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा, जिस दिन हमने अलग से बजट पेश करना बंद किया, उसी दिन से भारतीय रेल तबाह हो गई। ऐसा लगता है कि आजकल किसी को भी इन चीजों की परवाह नहीं है।
मोदी सरकार सच्चाई को दबाने में जुटी: ममता
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख का यह बयान दो जून को ओडिशा में हुए ट्रेन हादसे के बाद आया है, जिसमें पश्चिम बंगाल के निवासियों सहित 288 लोग मारे गए हैं। बनर्जी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह ट्रेन हादसे के पीछे की सच्चाई को दबाने में लगी है। उन्होंने कहा कि मैंने यह पहले भी कहा है और मैं इसे फिर से दोहराती हूं। हम सभी चाहते हैं कि दुर्घटना के कारणों के बारे में सच्चाई सामने आनी चाहिए। हालांकि, हमने देखा है कि कैसे सच्चाई साथ खिलवाड़ किया गया है और दुर्घटना के असली कारण को दबाने के लिए झूठी कहानियों को बढ़ावा दिया जाता है।
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मणिपुर में अशांति का उल्लेख करते हुए बनर्जी ने दावा किया कि केंद्र पत्रकारों सहित किसी को भी इस पूर्वोत्तर राज्य का दौरा करने की अनुमति नहीं दे रहा है, ताकि वह सच्चाई को दबा सके।उन्होंने कहा कि मणिपुर और उत्तर प्रदेश में हो रहे अत्याचारों पर चुप रहने के लिए उन्हें (भाजपा को) खुद पर शर्म आनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने कई परियोजनाओं और योजनाओं के लिए पश्चिम बंगाल को पैसे भेजना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद नई दिल्ली में नई सरकार बनने के बाद इन मुद्दों का समाधान हो जाएगा।