पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर को लेकर मचे सियासी विवाद के बीच सीईओ कार्यालय ने स्पष्ट किया कि अमर्त्य सेन, मोहम्मद शमी और सांसद देव को भेजे गए सुनवाई नोटिस किसी को निशाना बनाकर नहीं थे। गणना फॉर्म में लिंकेज कॉलम खाली पाए जाने पर चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार स्वचालित रूप से यह कार्रवाई की गई।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चर्चा और सियासत दोनों तेज है। वहीं अब राज्य में चर्चित नामों को भेजे गए चुनावी नोटिस पर उठे विवाद के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने स्थिति स्पष्ट की है। कार्यालय ने साफ किया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन, क्रिकेटर मोहम्मद शमी और तृणमूल सांसद देव को को भेजे गए विशेष गहन संशोधन सुनवाई के नोटिस किसी को निशाना बनाकर नहीं भेजे गए थे, बल्कि यह पूरी तरह नियमित और नियमों के तहत की गई चुनावी जांच प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
उम्र को देखते हुए विशेष कदम
कार्यालय ने साफ कहा कि डॉ. अमर्त्य सेन को नोटिस अन्य समान मामलों की तरह ही भेजा गया, इसमें कोई अलग व्यवहार नहीं किया गया। सीईओ कार्यालय ने यह भी बताया कि अमर्त्य सेन की उम्र 85 वर्ष से अधिक होने के कारण, उन्हें दफ्तर बुलाने के बजाय ERO/AERO और BLO खुद उनके घर गए। वहीं जाकर सारी औपचारिकताएं पूरी की गईं।
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