भाजपा के दो सांसदों ने उत्तर बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर नया केंद्रशासित प्रदेश बनाने की मांग की है। इसे लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वह बंगाल के किसी भी हिस्से को अपनी स्वतंत्रता नहीं खोने देंगी। उसे नई दिल्ली पर निर्भर नहीं होने देंगी।
भाजपा को हार के बाद शर्मिंदा होना चाहिए: ममता
उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव में हार के बाद भाजपा को शर्मिंदा होना चाहिए, लेकिन इसकी जगह वे बंगाल को विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं। वे किसके हित में बंगाल को विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने से लोगों के अधिकार छिन जाते हैं क्योंकि इससे उन्हें वे लाभ नहीं मिल पाते, जो राज्य के लोगों को मिलते हैं।
बनर्जी ने कहा, 'मैं किसी को भी बंगाल का विभाजन नहीं करने दूंगी। केंद्रशासित प्रदेश का मतलब नई दिल्ली की दया पर निर्भर होना और सभी स्वतंत्रता खोना है। लेकिन मैं उत्तर बंगाल या बंगाल के किसी भी हिस्से को उसकी स्वतंत्रता नहीं खोने दूंगी और उसे नयी दिल्ली पर निर्भर नहीं बनने दूंगी।’’
पांच जिलों में भाजपा के 20 विधायक
बता दें, उत्तर बंगाल के पांच जिलों में भाजपा के 20 विधायक हैं। ये जिले हैं-अलीपुर द्वार, कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग व कलिम्पोंग। इन जिलों में टीएमसी के छह व गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का एक विधायक है।