पश्चिम बंगाल में उप चुनावों में भाजपा की हालिया हार के बाद पार्टी की राज्य इकाई में आंतरिक कलह की खबरें सामने आई हैं। बीते दिनों पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा था कि प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार को सब पर ध्यान देना चाहिए और अनुभवी नेताओं को दरकिनार नहीं करना चाहिए। घोष की टिप्पणी पर अब मजूमदार ने भी प्रतिक्रिया दी है।
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी में चल रही अंदरूनी कलह थमती हुई दिखाई नहीं दे रही है। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कुछ दिनों पहले भाजपा की बंगाल इकाई के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार को इस पद के लिए तुलनात्मक रूप से नया बताया था। वहीं, रविवार को मजूमदार ने कहा कि रातों-रात कोई अनुभवी नहीं हो जाता है।
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उत्तर बंगाल में बलूरघाट से सांसद मजूमदार ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को जब कोई पद दिया जाता तो उस समय वह उसके लिए नया होता है। उन्होंने आगे कहा कि जब 2015 में जब दिलीप घोष को पहली बार राज्य में पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया था, तब वह भी इस पद के लिए नए ही थे।
हालांकि, बाद में घोष ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि पद के लिए नए होने का मतलब यह था कि मजूमदार पार्टी कार्यकर्ताओं में नए नजरिए का संचार कर सकेंगे और इसके साथ ही राज्य में भाजपा को बहुआयामी नेतृत्व प्रदान कर सकेंगे। सुकांत मजूमदार को पार्टी ने पिछले साल सितंबर में बंगाल इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
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अभी तक इस मामले पर टिप्पणी करने से बचते रहे मजूमदार ने रविवार को कहा, 'दिलीप दा (दिलीप घोष) वरिष्ठ नेता हैं। लेकिन मैं बता देना चाहता हूं कि जब भी कोई पहली बार पद संभालता है तो वह उसके लिए नया ही होता है। जब दिलीप दा को पहली बार यह पद दिया गया था तब वह भी नए ही थे। ऐसा हर पद पाने वाले के साथ होता है।'